गन्ना भाव में ₹10-20 की बढ़ोतरी संभव: 2026-27 एसएपी पर सरकार विचार में, किसान मांग रहे ₹100, मिलें कह रही रोक लगाओ

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के करीब 50 लाख गन्ना किसानों के लिए इस पेराई सत्र की सबसे अहम खबर आ गई है। राज्य सरकार 2026-27 सत्र के लिए गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में ₹10 से ₹20 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। बिजनेस स्टैंडर्ड की 3 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के अंदर इस पर मंथन चल रहा है, लेकिन बढ़ोतरी की रकम पर सहमति नहीं बनी है। 2026-27 का गन्ना भाव अभी तय नहीं हुआ है — घोषणा बाकी है।
पेराई सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन किसानों को अब तक यह नहीं पता कि उन्हें इस साल के गन्ने का भाव क्या मिलेगा। एक तरफ किसान संगठन ₹50 से ₹100 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी मांग रहे हैं, दूसरी तरफ चीनी मिलें किसी भी बढ़ोतरी का विरोध कर रही हैं।
बढ़ोतरी का प्रस्ताव कहां से आया
एसएपी तय करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एसएपी सिफारिश समिति की बैठक हो चुकी है, जिसमें मिल मालिकों और किसान संगठनों से राय ली गई। गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा था कि अंतिम दौर की बैठक जल्द होगी, संभवतः दीपावली से पहले। रिपोर्टों में घोषणा दीपावली से पहले संभव बताई गई थी, पर 7 नवंबर तक फैसला नहीं आया है।
सिफारिश कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही लागू होगी, इसलिए बैठक के बाद भी किसान को अंतिम भाव का इंतजार करना पड़ रहा है।
किसान क्या मांग रहे हैं: ₹50 से ₹100 की बढ़ोतरी
भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा है कि गन्ना उत्पादन की लागत ₹400 प्रति क्विंटल को पार कर चुकी है, इसलिए एसएपी में कम से कम ₹100 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी होनी चाहिए। किसान संगठनों की मांग है कि अगेती किस्म का भाव ₹400 से बढ़ाकर ₹500 प्रति क्विंटल किया जाए।
किसानों की दलील है कि डीजल, खाद, बीज और मजदूरी — हर चीज महंगी हुई है। पिछले साल के भाव पर इस साल की लागत नहीं निकलती। इसलिए किसान संगठन हफ्तों से ₹450 से ₹600 प्रति क्विंटल भाव की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
मिलें क्यों कर रही हैं विरोध
दूसरी तरफ चीनी मिलों का पक्ष बिल्कुल उल्टा है। उत्तर प्रदेश शुगर मिल्स एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने चीनीमंडी से कहा कि उद्योग ने सरकार से मौजूदा भाव बनाए रखने का आग्रह किया है। मिल मालिकों का कहना है कि भाव में लगातार बढ़ोतरी और बढ़ते संचालन खर्च ने उनकी वित्तीय स्थिति पर दबाव डाल दिया है।
चीनी उद्योग के एक अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि चीनी उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले सल्फर की कीमत में 80 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मिलों का तर्क है कि गन्ना और महंगा हुआ तो चीनी बनाना घाटे का सौदा हो जाएगा।
2025-26 का एसएपी क्या था
मौजूदा भाव किस सत्र का है, यह समझना जरूरी है। 2025-26 पेराई सत्र के लिए अगेती किस्म का एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का ₹390 प्रति क्विंटल तय किया गया था। अस्वीकृत किस्म का भाव ₹355 प्रति क्विंटल रहा। पिछले सत्र में ₹30 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई थी।
₹10 की बढ़ोतरी पर अगेती किस्म का भाव ₹410 और ₹20 पर ₹420 प्रति क्विंटल होगा। सामान्य किस्म का भाव ₹400 से ₹410 के बीच रहेगा। यानी 100 क्विंटल गन्ना बेचने वाले किसान को ₹1,000 से ₹2,000 तक का अतिरिक्त फायदा होगा।
एसएपी और एफआरपी में क्या अंतर है
उत्तर प्रदेश उन कुछ राज्यों में से है, जो गन्ने का अपना भाव (एसएपी) तय करते हैं। ज्यादातर राज्य केंद्र के तय उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) पर ही गन्ना खरीदते हैं। 2026-27 के लिए केंद्र का एफआरपी ₹3,650 प्रति टन यानी ₹365 प्रति क्विंटल है। यूपी का एसएपी इससे हमेशा ऊंचा रहता है, इसलिए यहां के किसानों को एफआरपी वाले राज्यों से ज्यादा भाव मिलता है।
इसलिए एसएपी का फैसला सिर्फ अर्थशास्त्र का नहीं, राजनीति का भी सवाल है। बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, गन्ने का असर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से लगभग 100 सीटों पर पड़ता है, खासकर पश्चिमी और मध्य यूपी में। चुनाव से पहले एसएपी बढ़ाने की परंपरा रही है, चाहे सत्ता में कोई भी दल रहा हो।
चुनावी समीकरण और विपक्ष का वादा
विधानसभा चुनाव कुछ ही महीनों दूर हैं और गन्ना किसान सबसे बड़ा वोट बैंक माने जाते हैं। इस सत्र में गन्ने का रकबा करीब 28 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है।
समाजवादी पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वादा किया है कि उनकी सरकार बनने पर किसानों को गन्ना देने के 24 घंटे के भीतर भुगतान मिलेगा। भुगतान में देरी किसानों की सबसे बड़ी शिकायत है, इसलिए इस वादे ने एसएपी के मुद्दे को और गर्म कर दिया है।
पेराई शुरू, भाव तय नहीं — किसानों पर क्या असर
इस बीच हकीकत यह है कि पेराई सत्र शुरू हो चुका है। कई मिलों में नए सत्र की पेराई शुरू हो गई है। लेकिन जब तक एसएपी की घोषणा नहीं होती, किसान यह नहीं जान पाते कि उनके गन्ने की असली कीमत क्या होगी। मिलें फिलहाल पुराने भाव से भुगतान कर रही हैं; अंतिम भाव पर अंतर का समायोजन होगा।
गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने 5 नवंबर को मेरठ में कहा था कि 97 प्रतिशत गन्ना किसानों का भुगतान हो चुका है और 3 प्रतिशत लंबित है। उन्होंने यह भी बताया कि 2002-2017 के 15 वर्षों में किसानों को कुल ₹1,47,000 करोड़ मिले थे, जबकि योगी सरकार के कार्यकाल में ₹3,31,000 करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड भुगतान हुआ है।
किसान इस बीच क्या करें
जब तक नया एसएपी घोषित नहीं होता, अपनी पर्ची और कैलेंडर पर नजर रखें — ई-गन्ना ऐप और caneup.in पर पर्ची कैलेंडर और आपूर्ति की जानकारी मिलती है। तौल पर्ची संभालकर रखें, ताकि भाव तय होने के बाद भुगतान का हिसाब मिलाया जा सके।
गन्ना किसानों के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 और 1800-180-5129 जारी हैं। एसएमएस जानकारी के लिए 51969 शॉर्टकोड का इस्तेमाल करें। घटतौली या गलत तौल की शिकायत भी इन्हीं माध्यमों से दी जा सकती है।
आपके सवाल
2026-27 सत्र का गन्ना भाव (एसएपी) अभी कितना है? अभी तक 2026-27 के एसएपी की घोषणा नहीं हुई है। सरकार ₹10-20 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। 2025-26 में अगेती किस्म ₹400 और सामान्य किस्म ₹390 प्रति क्विंटल थी।
अगर ₹20 की बढ़ोतरी हुई तो नया भाव क्या होगा? ₹20 की बढ़ोतरी पर अगेती ₹420 और सामान्य ₹410 प्रति क्विंटल होगी। ₹10 पर ये भाव ₹410 और ₹400 होंगे।
किसान ₹100 की बढ़ोतरी क्यों मांग रहे हैं? बीकेयू अध्यक्ष नरेश टिकैत के अनुसार, गन्ना उत्पादन की लागत ₹400 प्रति क्विंटल से ऊपर जा चुकी है। किसान अगेती किस्म का भाव ₹500 प्रति क्विंटल चाहते हैं, ताकि लागत के साथ मुनाफा भी मिले।
एसएपी और एफआरपी में क्या अंतर है? एफआरपी केंद्र सरकार का तय भाव है — 2026-27 के लिए ₹365 प्रति क्विंटल। एसएपी राज्य सरकार का तय भाव है, जो यूपी में एफआरपी से ऊंचा रहता है।
नए भाव की घोषणा कब तक हो सकती है? रिपोर्टों में घोषणा दीपावली से पहले संभव बताई गई थी, लेकिन 7 नवंबर तक अंतिम फैसला नहीं आया है। घोषणा होते ही जानकारी गन्ना विभाग से मिलेगी।
स्रोत: बिजनेस स्टैंडर्ड (3 नवंबर 2026), चीनीमंडी (3 नवंबर 2026), ईटीवी भारत (5 नवंबर 2026)
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