गन्ने की फसल बर्बाद हुई तो अब ₹9,800 प्रति हेक्टेयर मिलेगा: योगी सरकार ने आपदा मुआवजा 30% बढ़ाया, जान गंवाने पर ₹8 लाख

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए 6 नवंबर को बड़ी राहत की खबर आई है। योगी सरकार ने राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (एनडीआरएफ) के तहत दी जाने वाली आर्थिक सहायता के मानकों में बड़ा बदलाव किया है। अब गन्ने की फसल को प्राकृतिक आपदा से नुकसान पहुंचने पर 7,500 रुपये की जगह 9,800 रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेंगे। साथ ही, आपदा में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को मिलने वाली सहायता दोगुनी करके 4 लाख से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दी गई है।
राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने बताया कि नए मानक वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक प्रभावी रहेंगे — अगले पांच साल तक आपदा नुकसान पर इन्हीं दरों से मदद मिलेगी।

गन्ने समेत हर फसल की नई दरें — पूरी सूची
सरकार ने फसल नुकसान पर मिलने वाली सहायता में 25 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है। सिंचित क्षेत्र में फसल नुकसान पर मिलने वाली सहायता 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 22,000 रुपये कर दी गई है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में यह राशि 8,500 रुपये से बढ़ाकर 11,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की गई है।
गन्ना किसानों के लिए सबसे अहम बदलाव गन्ने की फसल की दर में हुआ है। पहले गन्ने की फसल के नुकसान पर 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर मिलते थे, अब 9,800 रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेंगे — यानी हर हेक्टेयर पर 2,300 रुपये ज्यादा।
बागवानी और कृषि वानिकी की फसलों पर सहायता 22,500 से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और रेशम उत्पादन की फसलों पर 6,000 से बढ़ाकर 7,800 रुपये प्रति हेक्टेयर की गई है। कृषि भूमि के कटान और भूस्खलन से होने वाले नुकसान पर भी सहायता के मानक बढ़ाए गए हैं।
यह राशि फसल की पूरी कीमत नहीं, बल्कि आपदा राहत के तहत दी जाने वाली सहायता है। गन्ना लंबी अवधि की महंगी फसल है — बाढ़ से खड़ी फसल बर्बाद होने पर किसान की साल भर की मेहनत और पूंजी एक साथ डूब जाती है, ऐसे में यह सहायता अगली फसल के लिए खड़ा होने में मदद करती है।
जान गंवाने पर परिवार को ₹8 लाख — दोगुनी राहत
आपदा में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को मिलने वाली सहायता राशि दोगुनी कर दी गई है — पहले चार लाख रुपये मिलते थे, अब आठ लाख रुपये मिलेंगे। सरकार का कहना है कि इसका मकसद प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक संबल देना और उनकी आजीविका को दोबारा पटरी पर लाना है।
पशुधन की क्षति पर भी मुआवजा बढ़ा है। गाय, भैंस, घोड़े या ऊंट जैसे बड़े पशुओं की मृत्यु पर मिलने वाली सहायता 40,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गई है। बकरी, भेड़ और सूअर जैसे छोटे पशुओं के लिए यह राशि 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये की गई है। मुर्गीपालकों को भी राहत देते हुए प्रति मुर्गी सहायता राशि 100 रुपये से बढ़ाकर 130 रुपये कर दी गई है। भार ढोने वाले पशुओं की क्षति पर सहायता राशि 20,000 रुपये से बढ़ाकर 25,400 रुपये की गई है।
मकान और स्कूलों के नुकसान पर भी बढ़ी मदद
प्राकृतिक आपदाओं में मकानों और सार्वजनिक संस्थानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए भी नए मानक तय किए गए हैं। मैदानी क्षेत्रों में पूरी तरह क्षतिग्रस्त पक्के मकान के लिए अब 1.85 लाख रुपये और पहाड़ी क्षेत्रों में 2.06 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान किया गया है। पक्के मकान के आंशिक नुकसान पर मैदानी क्षेत्रों में 93,000 रुपये और पहाड़ी क्षेत्रों में 1.03 लाख रुपये मिलेंगे।
पूरी तरह क्षतिग्रस्त प्राथमिक विद्यालयों के लिए 15.50 लाख रुपये और माध्यमिक विद्यालयों, छात्रावासों, आईटीआई व पॉलिटेक्निक के लिए 26 लाख रुपये तक की सहायता तय है।
10 लाख से ज्यादा किसानों की फसल को पहले ही नुकसान
राहत आयुक्त ने बताया कि एक अप्रैल से चार नवंबर 2026 तक प्रदेश के 10,02,684 किसानों की करीब 52 लाख 14 हजार हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है। किसानों को समयबद्ध तरीके से मुआवजा देने के लिए सभी जिलाधिकारियों को नुकसान का विवरण भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
इस साल पश्चिमी यूपी में मानसून की बारिश सामान्य से काफी ज्यादा हुई — सहारनपुर में लगभग 1,400 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में करीब 900 मिलीमीटर हुई थी। ज्यादा बारिश से गन्ने में नमी बढ़ी, चीनी की रिकवरी घटी और कई मिलों को पेराई टालनी पड़ी। प्रदेश की 122 चीनी मिलों में से अब तक सिर्फ 19 में ही पेराई शुरू हो सकी है।
मुआवजा कैसे मिलेगा — डीबीटी से सीधे खाते में
सहायता राशि डीबीटी से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। लाभार्थियों की सूची और पात्रता का आधार सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि वास्तविक प्रभावितों को इसका लाभ मिल सके।
राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों को सामान्य परिस्थितियों में 30 दिनों तक भोजन, कपड़े और अस्थायी आवास की सहायता मिलेगी, जो विशेष परिस्थितियों में 60 दिन तक बढ़ सकती है। पेयजल की आपात व्यवस्था के लिए सामान्य स्थिति में 30 दिन और सूखे में 90 दिनों तक सहायता का प्रावधान है। औद्योगिक प्रतिष्ठानों में आग, विस्फोट या दुर्घटना से होने वाला नुकसान इस दायरे से बाहर रखा गया है।
गन्ना किसानों को क्या करना चाहिए
मुआवजा पाने के लिए किसान को भी कुछ कदम उठाने होंगे। खेत के नुकसान की जानकारी लेखपाल या तहसील कार्यालय को समय पर दें, ताकि सर्वे हो सके। फसल के नुकसान की फोटो और खेत का रिकॉर्ड अपने पास रखें। बैंक खाता और आधार की जानकारी अपडेट रखें, क्योंकि सहायता डीबीटी से सीधे खाते में आएगी। जिले से जारी लाभार्थी सूची में अपना नाम जरूर देखें — नाम छूटा हो या रकबा गलत हो, तो तहसील या जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं।
इस बीच गन्ना किसानों की एक और बड़ी उम्मीद अभी बाकी है — 2026-27 पेराई सत्र के लिए राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी नहीं हुई है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती किस्म का एसएपी 400 रुपये और सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल था। किसान संगठन 50 से 100 रुपये बढ़ोतरी मांग रहे हैं, जबकि सरकार 10 से 20 रुपये की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। अंतिम फैसला कैबिनेट को लेना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गन्ने की फसल के नुकसान पर अब कितना मुआवजा मिलेगा? गन्ने की फसल के नुकसान पर अब 9,800 रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेंगे, पहले 7,500 रुपये मिलते थे। यह सहायता नए एसडीआरएफ-एनडीआरएफ मानकों के तहत दी जाएगी।
नए मुआवजा मानक कब से लागू हैं? नए मानक वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक प्रभावी रहेंगे — अगले पांच साल तक आपदा नुकसान पर इन्हीं दरों से सहायता मिलेगी।
फसल नुकसान का मुआवजा कैसे मिलेगा? सहायता राशि डीबीटी से सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी। लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक की जाएगी और नुकसान का सर्वे लेखपाल व जिला प्रशासन कराता है।
आपदा में जान गंवाने पर परिवार को कितनी सहायता मिलेगी? अब परिवार को 8 लाख रुपये मिलेंगे — पहले यह राशि 4 लाख रुपये थी, यानी इसे दोगुना कर दिया गया है।
इस साल कितने किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा है? एक अप्रैल से चार नवंबर 2026 तक प्रदेश के 10,02,684 किसानों की करीब 52 लाख 14 हजार हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है।
स्रोत: दैनिक जागरण (6 नवंबर 2026), एबीपी लाइव (6 नवंबर 2026), इंडिया टीवी (6 नवंबर 2026)
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