यूपी में 122 में से सिर्फ 19 चीनी मिलें चालू, 15 दिन पहले पेराई का प्लान अटका: नमी से रिकवरी गिरी, किसानों की पर्ची पर क्या असर?

उत्तर प्रदेश में गन्ना पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत उस रफ्तार से नहीं हो पाई, जिसकी उम्मीद सरकार को थी। प्रदेश की कुल 122 चीनी मिलों में से अब तक सिर्फ 19 में ही पेराई शुरू हो सकी है। सरकार ने इस बार सत्र को सामान्य समय से करीब 15 दिन पहले शुरू करने की योजना बनाई थी, ताकि नई चीनी जल्दी बाजार में पहुंचे और दाम काबू में रहें। लेकिन गन्ने में बढ़ी नमी ने पूरा हिसाब बिगाड़ दिया है।
नमी ज्यादा होने से गन्ने से चीनी की रिकवरी गिर रही है, इसलिए मिलें अपना शेड्यूल बदलने पर मजबूर हुई हैं। इस देरी से नवंबर के पहले पखवाड़े में ही चीनी 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल महंगी हो गई है, और लाखों किसानों की पर्ची और गन्ना तुलाई का इंतजार लंबा हो रहा है।
15 दिन पहले पेराई का प्लान क्यों बना था
हर साल पेराई सत्र नवंबर के मध्य से दिसंबर की शुरुआत के बीच जोर पकड़ता है। इस बार सरकार ने नई चीनी की जल्दी सप्लाई और दाम स्थिर रखने के लिए सत्र को करीब 15 दिन पहले शुरू करने की योजना बनाई थी।
लेकिन मानसून की अच्छी बारिश ने इस योजना को पटरी से उतार दिया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस साल सामान्य से कहीं ज्यादा बारिश हुई, जिससे खेतों में खड़े गन्ने में नमी बढ़ गई। नमी वाला गन्ना पेरने पर उससे चीनी कम निकलती है, और मिलों को उतनी ही चीनी बनाने के लिए ज्यादा गन्ना पेरना पड़ता है। उत्पादन लागत बढ़ जाती है, इसलिए कई मिलों ने पेराई शुरू करने की तारीख आगे बढ़ा दी है।
बिजनौर में रिकवरी 1.5 प्रतिशत गिरी, बरकातपुर में 8.5 प्रतिशत
लखीमपुर खीरी के बाद यूपी का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक जिला बिजनौर इस संकट के केंद्र में है — शुरुआती आकलनों के अनुसार, जिले में रिकवरी पिछले साल से करीब 1.5 प्रतिशत कम है। बरकातपुर चीनी मिल में रिकवरी घटकर 8.5 प्रतिशत रह गई है, जबकि आमतौर पर 10 प्रतिशत की उम्मीद रहती है।
आम तौर पर एक क्विंटल गन्ने से कम से कम 10 किलो चीनी निकलती है। रिकवरी 8.5 प्रतिशत पर आ जाए तो सिर्फ साढ़े आठ किलो चीनी मिलती है। बरकातपुर मिल की नए सत्र की चीनी 5,400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है, और जब तक नई चीनी की आवक नहीं सुधरती, कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
सहारनपुर में 1,400 मिलीमीटर बारिश, पिछले साल थी 900 मिलीमीटर
सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओपी सिंह के अनुसार, जिले में इस साल लगभग 1,400 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में करीब 900 मिलीमीटर बारिश हुई थी। करीब 500 मिलीमीटर ज्यादा बारिश का सीधा असर गन्ने में चीनी की मात्रा पर पड़ा है।
हालांकि उप गन्ना आयुक्त ने यह भी साफ किया कि फसल की समग्र स्थिति अच्छी है — इस साल पैदावार बढ़ने की उम्मीद है और बीमारियां भी सीमित रही हैं। यानी समस्या फसल की मात्रा की नहीं, बल्कि गन्ने में चीनी की मात्रा की है, जो नमी कम होते ही सुधरने की उम्मीद है।
चीनी के दाम 500-600 रुपये क्यों बढ़े
नवंबर के पहले पखवाड़े में चीनी के दाम 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ गए हैं। इसके पीछे दो कारण हैं — नई चीनी की आवक कम है, क्योंकि ज्यादातर मिलें अभी चालू ही नहीं हुई हैं, और पिछले सत्र का बचा हुआ स्टॉक लगातार घट रहा है। किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि चीनी कितनी महंगी हुई, बल्कि यह है कि उनकी मिल कब चलेगी।
बाकी 103 मिलें कब चलेंगी
उप गन्ना आयुक्त के अनुसार, बाकी मिलों को भी जल्द चालू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। गन्ना विकास विभाग के अनुसार, 4 नवंबर तक 33 चीनी मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिया था — यानी पर्ची जारी करने की प्रक्रिया कई मिलों में शुरू हो चुकी है, भले ही पेराई अभी शुरू न हुई हो। मेरठ जिले में मवाना, दौराला और किनौनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी है। अगले कुछ दिनों में बारिश थमने और धूप निकलने से गन्ने की नमी घटेगी, रिकवरी सुधरेगी और मिलें एक के बाद एक चालू होती जाएंगी।
किसानों को अब क्या करना चाहिए
पहली बात, घबराकर गन्ना बेचने की जल्दबाजी न करें। जिन मिलों ने इंडेंट जारी कर दिया है, वहां पर्ची के अनुसार ही गन्ना भेजें। पर्ची और कैलेंडर की ताजा जानकारी ई-गन्ना ऐप या caneup.in पर देखते रहें।
दूसरी बात, भाव को लेकर स्थिति यह है कि केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत की बेसिक रिकवरी पर लागू होगा। हालांकि, यूपी के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है — पिछले सत्र 2025-26 का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल (अगेती) था।
तीसरी बात, भुगतान को लेकर सतर्क रहें। अगर किसी मिल पर पिछले सत्र का बकाया है, तो शिकायत गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर करें। एसएमएस जानकारी के लिए शॉर्टकोड 51969 है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी यही हाल
यह समस्या सिर्फ यूपी तक सीमित नहीं है — महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी भारी बारिश से रिकवरी कम हुई है। देश भर में 31 अक्टूबर तक औसत रिकवरी 8.01 प्रतिशत रही, जबकि पिछले साल यह 8.44 प्रतिशत थी। महाराष्ट्र में 123 मिलों ने पेराई शुरू कर दी है, जो यूपी से कहीं आगे है।
किसानों के लिए अच्छी खबर यह है कि फसल की पैदावार अच्छी है और बीमारियां कम हैं। जैसे-जैसे गन्ने की नमी घटेगी, रिकवरी सुधरेगी और बाकी मिलें भी पेराई शुरू करेंगी। फिलहाल सबसे ज्यादा जरूरत धैर्य और सही जानकारी की है — अपनी मिल की पर्ची, इंडेंट और पेराई की तारीख पर नजर रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यूपी में अब तक कितनी चीनी मिलों में पेराई शुरू हुई है? प्रदेश की 122 चीनी मिलों में से अब तक सिर्फ 19 में पेराई शुरू हुई है।
पेराई 15 दिन पहले शुरू करने का प्लान क्यों अटका? भारी बारिश से गन्ने में नमी बढ़ गई और रिकवरी गिर गई, इसलिए मिलों को अपना शेड्यूल बदलना पड़ा।
बिजनौर में गन्ने की रिकवरी कितनी गिरी है? बिजनौर में रिकवरी पिछले साल से करीब 1.5 प्रतिशत कम है। बरकातपुर मिल में रिकवरी 8.5 प्रतिशत रह गई है, जबकि आमतौर पर 10 प्रतिशत की उम्मीद रहती है।
चीनी के दाम क्यों बढ़े हैं? नई चीनी की आवक कम है और पुराना स्टॉक घट रहा है, इसलिए नवंबर के पहले पखवाड़े में दाम 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ गए हैं।
2026-27 के लिए गन्ने का भाव क्या तय हुआ है? 2026-27 के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत बेसिक रिकवरी पर) तय है। यूपी के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है; 2025-26 का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल (अगेती) था।
गन्ना भुगतान की शिकायत कहां करें? गन्ना भुगतान या पर्ची से जुड़ी शिकायत गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर की जा सकती है। एसएमएस जानकारी के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 है।
स्रोत: गांव जंक्शन, एग्रीइनसाइट (द टाइम्स ऑफ इंडिया के हवाले से), दैनिक जागरण
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
यह आर्टिकल कैसा लगा?


