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122 में से सिर्फ 19 मिलें चालू, गन्ने में नमी से रिकवरी 8.5% रह गई — चीनी ₹5,400 क्विंटल, किसानों को क्या करना चाहिए?

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 7, 2026 • 6 min read
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122 में से सिर्फ 19 मिलें चालू, गन्ने में नमी से रिकवरी 8.5% रह गई — चीनी ₹5,400 क्विंटल, किसानों को क्या करना चाहिए?
अंतिम अपडेट: November 7, 2026 6:01 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

उत्तर प्रदेश में 2026-27 का गन्ना पेराई सत्र उम्मीद से धीमी रफ्तार से शुरू हुआ है। प्रदेश की कुल 122 चीनी मिलों में से अब तक सिर्फ 19 मिलों में ही पेराई शुरू हो सकी है। सरकार ने इस बार सत्र को सामान्य समय से करीब 15 दिन पहले शुरू करने की योजना बनाई थी, ताकि दिवाली से पहले बाजार में नई चीनी की आवक बढ़े और कीमतों पर लगाम लगे। लेकिन मानसून की भारी बारिश ने इस योजना को अटका दिया है — गन्ने में नमी ज्यादा होने से चीनी की रिकवरी घट गई है और मिलों को अपने पेराई कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा है।

इस देरी का असर सीधे बाजार पर दिख रहा है। नवंबर के पहले पखवाड़े में चीनी के दामों में 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक की तेजी आ गई है। बिजनौर की बरकतपुर चीनी मिल की नई चीनी का भाव 5,400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।

19 मिलें ही क्यों चलीं? बारिश और नमी बनी बड़ी वजह

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस साल मानसून की बारिश सामान्य से काफी ज्यादा हुई है। सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओपी सिंह के अनुसार, जिले में इस साल लगभग 1,400 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में करीब 900 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इतनी ज्यादा बारिश का सीधा असर गन्ने की मिठास पर पड़ा है — गन्ने में पानी की मात्रा बढ़ गई और चीनी की मात्रा कम हो गई।

यही वजह है कि कई मिलों ने पेराई शुरू करने का कार्यक्रम टाल दिया है। मिलें जानती हैं कि नमी वाले गन्ने की पेराई करने पर चीनी कम निकलेगी और उत्पादन लागत बढ़ जाएगी। इसलिए वे गन्ने के थोड़ा सूखने और मिठास बढ़ने का इंतजार कर रही हैं।

बिजनौर में रिकवरी 1.5% घटी, बरकतपुर में सिर्फ 8.5%

लखीमपुर खीरी के बाद उत्तर प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े गन्ना उत्पादक जिले बिजनौर में इस समस्या का सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है। शुरुआती आकलनों के अनुसार, पिछले साल इसी समय की तुलना में इस बार चीनी की रिकवरी करीब 1.5 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। जिले की बरकतपुर चीनी मिल में रिकवरी घटकर 8.5 प्रतिशत रह गई है, जबकि आमतौर पर 10 प्रतिशत की उम्मीद की जाती है।

रिकवरी का मतलब समझना किसानों के लिए जरूरी है। सामान्य रूप से मिलें एक क्विंटल गन्ने से कम से कम 10 किलो चीनी निकालती हैं। रिकवरी घटने का मतलब है कि मिलों को उतनी ही चीनी बनाने के लिए अधिक गन्ने की पेराई करनी पड़ती है, जिससे उत्पादन का खर्च बढ़ जाता है।

देश भर में उत्पादन चार गुना, पर यूपी पीछे

भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा विनिर्माता संघ (इस्मा) के ताजा आंकड़े एक दिलचस्प तस्वीर दिखाते हैं। देश में विपणन वर्ष 2026-27 में अब तक चीनी का उत्पादन चार गुना बढ़कर 12.85 लाख टन रहा है। इस्मा के अनुसार, 5 नवंबर 2026 तक देशभर की 184 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 154 मिलों में पेराई शुरू हुई थी।

लेकिन उत्तर प्रदेश की तस्वीर इससे अलग है। प्रदेश की 19 मिलों ने अब तक सिर्फ 0.20 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है, जबकि पिछले साल इसी समय 32 मिलें चल रही थीं और 1.10 लाख टन चीनी बनी थी। महाराष्ट्र इसमें सबसे आगे है, जहां 136 मिलों ने 10.78 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है, जो पिछले साल के 1.23 लाख टन से काफी अधिक है।

बाकी मिलें कब चलेंगी? दिवाली के बाद रफ्तार की उम्मीद

किसानों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी मिल कब चलेगी। इस्मा के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ज्यादातर बची हुई मिलों में अगले कुछ दिनों में पेराई शुरू होने की उम्मीद है, जबकि मध्य उत्तर प्रदेश की बाकी मिलें दिवाली के तुरंत बाद चालू हो सकती हैं। मवाना शुगर्स ने 6 नवंबर को मेरठ स्थित अपने दोनों संयंत्रों में 2026-27 सत्र की पेराई शुरू कर दी है। कंपनी की प्रतिदिन 19,000 टन गन्ना पेराई की संयुक्त क्षमता है।

गन्ने का भाव: 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी

पेराई शुरू होने के साथ ही किसानों की नजरें गन्ने के भाव पर टिकी हैं। साफ कर दें कि 2026-27 सत्र के लिए राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी बाकी है। 2025-26 सत्र के लिए अगेती किस्म का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था।

किसान संगठन इस बार एसएपी में 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने सरकार से गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है। उनका कहना है कि गन्ने की उत्पादन लागत 400 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच चुकी है। उधर, सरकार 10 से 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है और अंतिम फैसला राज्य कैबिनेट को लेना है।

किसानों को क्या करना चाहिए? ये 5 बातें ध्यान रखें

पहली बात, अपनी मिल का पेराई कार्यक्रम जानने के लिए ई-गन्ना ऐप या गन्ना विकास विभाग की वेबसाइट पर अपना पर्ची कैलेंडर जरूर देखें।

दूसरी बात, अगर आपकी मिल अभी शुरू नहीं हुई है तो गन्ना काटने की जल्दबाजी न करें। खेत में खड़ा गन्ना मिल चलने तक सुरक्षित रहता है।

तीसरी बात, इस बार बारिश ज्यादा हुई है, इसलिए खेत में पानी भरा हो तो गन्ना काटने से पहले खेत को सूखने दें।

चौथी बात, भुगतान की स्थिति पर नजर रखें। पेराई सत्र शुरू होने के 14 दिन के भीतर भुगतान का नियम है। अगर आपकी मिल ने पिछले सत्र का बकाया नहीं चुकाया है तो गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी से शिकायत करें।

पांचवीं बात, गन्ने की नई किस्मों पर ध्यान दें। लाल सड़न रोग से परेशान किसानों के लिए को.शा. 23232 किस्म एक विकल्प के रूप में सामने आई है, जिसमें 95 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज मिली है।

आपके सवाल

यूपी में अब तक कितनी चीनी मिलों में पेराई शुरू हुई है? उत्तर प्रदेश की कुल 122 चीनी मिलों में से 5 नवंबर 2026 तक 19 मिलों में पेराई शुरू हो चुकी है।

गन्ने से चीनी की रिकवरी क्यों घटी है? इस साल मानसून की भारी बारिश से गन्ने में नमी बढ़ गई है। सहारनपुर में 1,400 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि पिछले साल 900 मिलीमीटर हुई थी। बिजनौर में रिकवरी पिछले साल से 1.5 प्रतिशत कम है और बरकतपुर मिल में यह 8.5 प्रतिशत रह गई है।

चीनी का भाव अभी कितना है? नवंबर के पहले पखवाड़े में चीनी के दामों में 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई है।

2026-27 के लिए गन्ने का एसएपी कितना तय हुआ है? 2026-27 सत्र के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। 2025-26 में अगेती किस्म का एसएपी 400 रुपये और सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल था।

मेरी मिल कब चलेगी, यह कैसे पता करें? अपने क्षेत्र की मिल का पेराई कार्यक्रम ई-गन्ना ऐप या गन्ना विकास विभाग की वेबसाइट पर देखें।

स्रोत: गांव जंक्शन (6 नवंबर 2026), आईबीसी24/भाषा (6 नवंबर 2026), एग्रीइनसाइट (6 नवंबर 2026), बिजनेस स्टैंडर्ड (3 नवंबर 2026), चिनीमंडी (3 नवंबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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