चीनी मिलों के एस्क्रो खातों का रियल-टाइम ऑटोमेटेड ऑडिट शुरू: 85% बिक्री का पैसा सीधे किसानों को — फंड डायवर्जन पर पूर्ण रोक

लखनऊ (CaneUp विशेष ब्यूरो — 24 सितंबर 2026 शाम 5:55 बजे): उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को 14 दिन के भीतर उनकी उपज का पाई-पाई भुगतान सुनिश्चित कराने के लिए शासन ने देश का पहला ‘रियल-टाइम ऑटोमेटेड एस्क्रो अकाउंट ऑडिट सिस्टम’ (Real-Time Escrow Fintech System) लागू कर दिया है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और केन कमिश्नर आईटी सेल ने संयुक्त रूप से इस बैंकिंग एपीआई को राज्य की सभी 120 चीनी मिलों के कोर बैंकिंग सिस्टम से जोड़ दिया है।
उत्तर प्रदेश गन्ना पूर्ति एवं खरीद विनियमन अधिनियम 1953 के तहत नियम है कि मिलों को अपनी चीनी और उप-उत्पादों की बिक्री से प्राप्त कुल राजस्व का 85% हिस्सा अनिवार्य रूप से गन्ना भुगतान के लिए आरक्षित रखना होता है।
🔴 लाइव अपडेट — 29 सितंबर 2026
बजाज मिल के बकाया पर गोला में किसानों का हंगामा: लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में सहकारी गन्ना विकास समिति की बैठक के दौरान किसानों ने बजाज चीनी मिल के बकाया भुगतान का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। किसानों ने 15 अक्टूबर तक ब्याज सहित पूरा भुगतान कराने की मांग की और चेतावनी दी कि भुगतान न हुआ तो आगामी पेराई सत्र शुरू नहीं होने दिया जाएगा। भुगतान के मुद्दे पर विधायक अमन गिरि से भी बहस हुई। डेलीगेटों ने गन्ना आयुक्त को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
विलंबित भुगतान पर 15% ब्याज की लड़ाई तेज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 जुलाई 2026 को गन्ना पेराई सत्र 1996-97 से 2025-26 तक के विलंबित भुगतान पर 15 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश दिया था। अदालत ने 12% ब्याज पर जारी वसूली प्रमाणपत्रों पर सख्त नाराजगी जताई, जिसके बाद गन्ना आयुक्त ने 30 जुलाई को इन्हें 15% के अनुरूप संशोधित करने की प्रक्रिया शुरू की। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होनी है।
मुख्यमंत्री को ज्ञापन — पेराई से पहले बकाया चुकाने की मांग: भाकियू (अराजनैतिक) के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि नए पेराई सत्र की शुरुआत से पहले बजाज चीनी मिल का समस्त बकाया गन्ना भुगतान हर हाल में कराया जाए। ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार देय ब्याज की राशि किसानों के बैंक खातों में शीघ्र भेजने की मांग भी उठाई गई है।
💳 नई एस्क्रो प्रणाली के 4 अभेद्य वित्तीय नियम
- ऑटोमेटेड स्प्लिट (Automated Revenue Split): जब भी कोई थोक व्यापारी चीनी या शीरे की खरीद का पैसा चीनी मिल के खाते में ट्रांसफर करेगा, बैंकिंग सॉफ्टवेयर स्वतः 85% राशि को किसान एस्क्रो खाते में और 15% राशि को मिल के ऑपरेशनल खाते में अलग-अलग कर देगा।
- नो-डायवर्जन लॉक (No Diversion Lock): मिल प्रबंधन किसान एस्क्रो खाते से किसी अन्य मद (कर्मचारी वेतन, बिजली बिल या निजी लाभ) में एक भी रुपया ट्रांसफर नहीं कर सकेगा।
- दैनिक डीबीटी ट्रिगर: जैसे ही एस्क्रो खाते में न्यूनतम ₹50 लाख का बैलेंस होगा, सिस्टम स्वतः उस दिन की सबसे पुरानी लंबित पर्चियों का आरटीजीएस ट्रिगर कर किसानों के खातों में पैसा भेज देगा।
- मुख्यालय पर लाइव अलर्ट: यदि कोई मिल चीनी का स्टॉक गोदाम से बाहर निकालती है और उसका इनवॉइस बैंक खाते में 24 घंटे में नहीं दिखता, तो स्वतः जिला गन्ना अधिकारी को रेड-फ्लैग अलर्ट चला जाएगा।
📊 पारदर्शिता का नया स्तर
- किसानों को एसएमएस अलर्ट: मिल द्वारा एस्क्रो खाते में पैसा डालते ही संबंधित गांव के किसानों को नोटिफिकेशन जाएगा कि “आपकी मिल द्वारा आज ₹X करोड़ का भुगतान जारी किया गया है।”
- कानूनी सुरक्षा: धारा 17 के तहत बैंक सीधे गन्ना आयुक्त के प्रति जवाबदेह होंगे।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: क्या यह व्यवस्था सहकारी और निजी दोनों मिलों पर लागू होगी?
उत्तर: जी हाँ! प्रदेश में संचालित सभी 93 निजी, 24 सहकारी और 3 निगम चीनी मिलों पर यह नियम समान रूप से लागू किया गया है।
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