88 करोड़ बकाया से दिवाली फीकी: सहारनपुर के गन्ना किसानों को 12 करोड़ का वादा, बाकी पैसा कब मिलेगा, जानें

नागल के बाजारों में दिवाली की रौनक लौटने लगी है, लेकिन गांगनौली स्थित बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल से जुड़े गन्ना किसानों के घरों में इस बार त्योहार की खुशियां फीकी नजर आ रही हैं। पिछले पेराई सत्र का करीब 88 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य भुगतान अब भी बकाया है। किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जेब खाली है तो दिवाली कैसे मनाएं। मिल प्रबंधन ने दिवाली से पहले करीब 12 करोड़ रुपये के भुगतान का वादा किया है, पर हजारों किसान यह पूछ रहे हैं कि बाकी रकम कब मिलेगी।
88 करोड़ का बकाया आखिर है क्या
यह बकाया कोई एक-दो महीने पुराना नहीं है। यह पिछले पेराई सत्र का गन्ना मूल्य है, जो मिल को किसानों को बहुत पहले चुका देना चाहिए था। अमर उजाला की 4 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, गांगनौली मिल से जुड़े किसानों का करीब 88 करोड़ रुपये अब तक अटका हुआ है। क्षेत्र का अधिकांश किसान अपनी आजीविका के लिए गन्ने की खेती पर निर्भर है। किसान पूरे साल खेतों में मेहनत करके गन्ने की फसल तैयार करता है और मिल में गन्ना डालने के बाद मिलने वाले भुगतान से परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च और खेती की अगली तैयारी करता है। भुगतान समय पर न मिलने से किसानों का पूरा आर्थिक गणित बिगड़ गया है। किसानों को उम्मीद थी कि दिवाली से पहले मिल प्रबंधन बकाया चुका देगा, लेकिन अब उनकी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
98 करोड़ से 88 करोड़ तक: बकाया घटा कैसे
पिछले तीन महीनों के आंकड़े बताते हैं कि बकाया धीरे-धीरे घटा है, पर रफ्तार बहुत धीमी है। अगस्त 2026 में न्यूज18 लोकल18 की रिपोर्ट के अनुसार, गांगनौली मिल पर 98.45 करोड़ रुपये बकाया था। सितंबर तक यह रकम करीब 96 करोड़ रुपये रह गई थी। अमर उजाला की 8 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन और गन्ना विभाग की चेतावनी के बाद करीब 20 दिनों में किसानों के खाते में आठ करोड़ रुपये भेजे गए थे, जिसके बाद बकाया 88.51 करोड़ रुपये रह गया। अब नवंबर की ताजा रिपोर्ट में यह आंकड़ा करीब 88 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। तीन महीने में करीब 10 करोड़ रुपये ही चुकाए गए हैं। इसी धीमी रफ्तार को लेकर किसानों में नाराजगी है। भारतीय किसान यूनियन टिकैत के राष्ट्रीय सचिव विनय चौधरी ने अक्टूबर में कहा था कि गांगनौली चीनी मिल भुगतान करने में हमेशा आनाकानी करती है।
मिल प्रबंधन का वादा: दिवाली से पहले 12 करोड़
इस बार मिल प्रबंधन की ओर से एक ठोस वादा सामने आया है। बजाज शुगर मिल में तैनात गन्ना महाप्रबंधक ओमवीर सिंह का कहना है कि दिवाली से पहले किसानों को एक सप्ताह का करीब 12 करोड़ रुपये गन्ना बकाया भुगतान किया जाएगा। यह रकम कुल बकाए का करीब सातवां हिस्सा है। वादा पूरा होता है तो दिवाली पर किसानों के हाथ में कुछ पैसा आएगा, लेकिन 76 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा इसके बाद भी बाकी रहेगा। वादा कितना भरोसेमंद है, यह भी सवाल है, क्योंकि पहले भी कई बार आश्वासन दिए गए हैं। लेकिन दिवाली से पहले 12 करोड़ रुपये का भुगतान होगा या नहीं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
किसान क्या कह रहे हैं
बढ़ेड़ी कोली निवासी किसान सीटू चौधरी का कहना है कि किसान अपने बच्चों को त्योहारों पर नए कपड़े और मिठाई दिलाने की इच्छा रखता है, लेकिन गन्ने का भुगतान नहीं मिलने से जरूरी सामान की खरीदारी भी नहीं हो पा रही है। इसाकपुर निवासी पलटू राम का कहना है कि खेती में खाद, बीज, डीजल और मजदूरी पर पहले ही काफी खर्च हो चुका है और अब घरेलू खर्च चलाने के लिए भी उधार लेना पड़ रहा है। किसान कब तक कर्ज लेकर परिवार का पालन-पोषण करेगा। खटोली निवासी आदेश त्यागी का कहना है कि इसी रकम से किसान अगली फसल की तैयारी भी करता है, इसलिए देरी से खाद-बीज खरीदने में भी परेशानी हो रही है।
सहारनपुर में सिर्फ गांगनौली नहीं
गांगनौली का मामला सहारनपुर मंडल की बड़ी तस्वीर का एक हिस्सा है। न्यूज18 लोकल18 की 26 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, सहारनपुर जिले की चीनी मिलों पर किसानों का 100 करोड़ रुपये से अधिक बकाया था। इसमें गांगनौली बजाज शुगर मिल पर 98.45 करोड़ रुपये और गागलहेड़ी शुगर मिल पर 2.54 करोड़ रुपये बकाया था। अमर उजाला की अक्टूबर की रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि दया शुगर मिल पर भी किसानों का 22 करोड़ रुपये बकाया है और मिल का पिछले वर्ष संचालन नहीं हो सका था। यह बकाया दो वर्ष पुराने पेराई सत्र का है। देवबंद की चीनी मिल भुगतान में सबसे आगे बताई गई थी, जबकि गांगनौली सबसे पीछे खड़ी मिलों में से एक है।
15 दिन का नियम और किसान क्या करें
उत्तर प्रदेश में नियम साफ है। गन्ना मिलों को किसानों को फसल का पूरा भुगतान गन्ना मिलने के 15 दिनों के भीतर करना होता है। देरी होने पर मिलों को बकाया राशि पर ब्याज देना अनिवार्य है। इसके बावजूद गांगनौली जैसे मामलों में बकाया महीनों और सालों तक लटका रहता है। अपनी पर्ची, तौल की रसीद और भुगतान का रिकॉर्ड संभालकर रखें। अगर मिल भुगतान नहीं करती है तो गन्ना समिति और जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 तथा एसएमएस शॉर्टकोड 51969 उपलब्ध हैं।
इस बीच पेराई सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है। गन्ना विकास विभाग के अनुसार, प्रदेश की नौ चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी है, जबकि 33 मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिया है। गांगनौली से जुड़े किसानों के लिए सबसे अहम बात यह है कि नए सत्र में गन्ना डालने से पहले अपनी पर्ची और क्रय केंद्र की जानकारी की पुष्टि कर लें। पेराई सत्र 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 के लिए अगेती किस्म का मूल्य 400 रुपये और सामान्य किस्म का मूल्य 390 रुपये प्रति क्विंटल था। नया एसएपी घोषित होने तक पिछले सत्र के भाव को इस सत्र का भाव न समझें। किसान संगठन 600 रुपये प्रति क्विंटल मांग रहे हैं, पर अंतिम फैसला बाकी है। प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं, यह सिर्फ सहारनपुर की तस्वीर है।
जवाब जानिए
गांगनौली मिल पर कितना बकाया है? करीब 88 करोड़ रुपये। यह पिछले पेराई सत्र का गन्ना मूल्य भुगतान है। अगस्त में यह 98.45 करोड़ रुपये था, जो धीरे-धीरे घटकर 88 करोड़ रुपये रह गया है।
दिवाली से पहले कितना भुगतान मिलेगा? मिल के गन्ना महाप्रबंधक ओमवीर सिंह ने कहा है कि दिवाली से पहले किसानों को एक सप्ताह का करीब 12 करोड़ रुपये भुगतान किया जाएगा। यह वादा है, भुगतान होने पर ही इसकी पुष्टि होगी।
किसान अपना बकाया कैसे जांचें? अपनी गन्ना समिति से अपने नाम के बकाए की पुष्टि करें। टोल-फ्री 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर भी जानकारी मिल सकती है। पर्ची और तौल की रसीद संभालकर रखें।
इस सत्र का गन्ना भाव क्या है? 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती किस्म का भाव 400 रुपये और सामान्य किस्म का भाव 390 रुपये प्रति क्विंटल था।
स्रोत: अमर उजाला (सहारनपुर, 4 नवंबर 2026; 8 अक्टूबर 2026), न्यूज18 लोकल18 (26 अगस्त 2026), डाइनामाइट न्यूज (28 अक्टूबर 2026)।
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