मुजफ्फरनगर: 7 दिन पीछे चला पेराई सत्र, रिकवरी 8% पर अटकी — 6 मिलें धनतेरस से शुरू, गेहूं बुआई पर संकट

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक जिलों में गिने जाने वाले मुजफ्फरनगर में इस बार दिवाली से पहले किसानों को जोर का झटका लगा है। जिले की आठ चीनी मिलों में से अब तक सिर्फ दो मिलें ही पेराई सत्र 2026-27 में चल पाई हैं, और बाकी छह मिलों का सत्र पूरे सात दिन पीछे चला गया है। पिछले साल एक नवंबर के आसपास जिले की ज्यादातर मिलों में पेराई शुरू हो गई थी, लेकिन इस बार अधिकतर मिलें धनतेरस यानी छह नवंबर से शुरू हो रही हैं।
अमर उजाला की पांच नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में अब तक सहकारी क्षेत्र की मोरना मिल और निजी क्षेत्र की खाईखेड़ी मिल ने ही गन्ने की खरीद शुरू की है। दोनों मिलों ने मिलकर अब तक सिर्फ 69 हजार क्विंटल गन्ना खरीदा है। कई गांवों में अभी तक तौल केंद्र तक नहीं लगे हैं।
सिर्फ दो मिलें चलीं, 69 हजार क्विंटल गन्ना खरीदा
मुजफ्फरनगर जिले में कुल आठ चीनी मिलें हैं। इनमें मोरना सहकारी मिल, खाईखेड़ी की उत्तम शुगर मिल, खतौली की त्रिवेणी मिल, भैसाना, तितावी, मंसूरपुर, टिकौला और रोहाना कलां की मिलें शामिल हैं। पेराई सत्र 2026-27 के पहले सप्ताह में इनमें से सिर्फ मोरना और खाईखेड़ी ही चल पाई हैं। दोनों मिलों ने एक से तीन नवंबर के बीच कुल 69 हजार क्विंटल गन्ना खरीदा है।
यह देरी सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है। खेत में खड़ा गन्ना हर दिन भारी होता जा रहा है और किसान को डर है कि देर से तौल हुई तो गन्ना सूखेगा और वजन घटेगा। दूसरी तरफ, गन्ना कटने के बाद ही खेत खाली होगा और गेहूं की बुआई हो पाएगी। पेराई सत्र सात दिन पीछे खिसकने का मतलब है कि गेहूं की अगेती बुआई भी उतने ही दिन पीछे खिसकेगी।
सात दिन की देरी और मिलवार पेराई तिथियां
पिछले पेराई सत्र में जिले की औसत पेराई एक नवंबर को शुरू हो गई थी। इस बार अधिकतर मिलें छह नवंबर, धनतेरस के दिन से पेराई शुरू कर रही हैं।
अमर उजाला की पांच नवंबर की रिपोर्ट में मिलवार ताजा तिथियां दी गई हैं। भैसाना मिल पांच नवंबर से पेराई शुरू कर रही है, जबकि खतौली, तितावी और मंसूरपुर की मिलें छह नवंबर से चलेंगी। टिकौला मिल सात नवंबर से और रोहाना कलां मिल नौ नवंबर से पेराई शुरू करेगी। रोहाना कलां मिल का औपचारिक शुभारंभ दो नवंबर को प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने पूजा-अर्चना के बाद केन कैरियर में गन्ना डालकर किया था।
रिकवरी आठ फीसदी पर क्यों अटकी
इस सत्र की दूसरी बड़ी चिंता चीनी की रिकवरी है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में गन्ने से चीनी की औसत रिकवरी इस समय सिर्फ आठ फीसदी के आसपास चल रही है, जबकि पिछले साल इसी समय यह नौ फीसदी के करीब थी।
रिकवरी गिरने की वजह अक्टूबर की असामान्य बारिश है। अमर उजाला की 31 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 30 अक्टूबर की रात अकेले 59.2 मिलीमीटर बारिश हुई और अक्टूबर महीने में कुल 132.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिसने पांच साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। खेतों में पानी भरने से गन्ने की मिठास और वजन दोनों पर असर पड़ा। रिकवरी कम होने पर मिल को एक क्विंटल गन्ने से कम चीनी मिलती है, जिससे मिल की भुगतान क्षमता पर दबाव पड़ता है।
खाईखेड़ी ने दिया 1.88 करोड़ का पहला भुगतान, भैसाना पर 21 करोड़ बकाया
देरी और रिकवरी की चिंता के बीच एक अच्छी खबर पुरकाजी क्षेत्र से आई है। उत्तम शुगर मिल खाईखेड़ी ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए किसानों को एक करोड़ 88 लाख रुपये का पहला गन्ना भुगतान किया है। यह भुगतान दिवाली पर्व को देखते हुए किया गया है। मिल ने एक से तीन नवंबर तक खरीदे गए गन्ने का यह भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजा है।
दूसरी तरफ, भैसाना चीनी मिल की तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, भैसाना मिल पांच नवंबर से पेराई शुरू कर रही है, लेकिन मिल पर पिछले पेराई सत्र का करीब 21 करोड़ रुपये का बकाया चला आ रहा है। मिल के पास चीनी का कोटा भी बकाया भुगतान के सापेक्ष कम है। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक का कहना है कि मिलों को समय पर इंडेंट जारी करना चाहिए, ताकि गेहूं की बुआई का संकट खड़ा न हो।
गेहूं बुआई पर संकट: किसान अब क्या करें
पेराई में देरी का सबसे सीधा असर गेहूं की बुआई पर पड़ रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना कटने के बाद खेत में गेहूं बोया जाता है। अगर गन्ना देर से कटेगा तो गेहूं की बुआई देर से होगी, और देर से बोए गए गेहूं की पैदावार कम होती है। दिवाली पर भी गन्ने का भुगतान न मिलने से किसानों में मायूसी है।
ऐसे में किसान कुछ काम तुरंत कर लें। पहला, अपनी पर्ची और कैलेंडर पर दर्ज तौल केंद्र और तिथि दोबारा जांचें, क्योंकि देरी के कारण कई केंद्रों की तिथियां बदल गई हैं। दूसरा, गन्ना समिति के सचिव या केंद्र प्रभारी से लिखित में पुष्टि लें। तीसरा, तौल पर्ची और भुगतान की रसीद संभालकर रखें। चौथा, अगर इंडेंट समय पर न मिले तो जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराएं। मदद के लिए टोल-फ्री 1800-121-3203 और 1800-180-5129, और एसएमएस शॉर्टकोड 51969 उपलब्ध हैं।
2026-27 एसएपी की घोषणा अब भी बाकी
गन्ने के भाव को लेकर भी किसानों की नजर सरकार की घोषणा पर टिकी है। साफ शब्दों में: पेराई सत्र 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश में एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। केंद्र सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो एक अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2027 तक लागू रहेगा। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती किस्म का भाव 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का भाव 390 रुपये प्रति क्विंटल था। यह पिछले सत्र का भाव है, इसे नए सत्र का भाव मानकर गन्ना न बेचें।
आपके सवाल
मुजफ्फरनगर में पेराई सत्र कितने दिन पीछे चला गया है? जिले की छह चीनी मिलों का पेराई सत्र सात दिन पीछे चला गया है। पिछले साल एक नवंबर को पेराई शुरू हो गई थी, इस बार अधिकतर मिलें छह नवंबर से शुरू हो रही हैं। सिर्फ मोरना और खाईखेड़ी मिलें ही समय पर चल पाई हैं।
किस मिल की पेराई कब से शुरू होगी? अमर उजाला की पांच नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, भैसाना पांच नवंबर, खतौली, तितावी और मंसूरपुर छह नवंबर, टिकौला सात नवंबर और रोहाना कलां नौ नवंबर से पेराई शुरू करेगी।
खाईखेड़ी मिल ने कितना भुगतान किया है और भैसाना पर कितना बकाया है? उत्तम शुगर मिल खाईखेड़ी ने सत्र 2026-27 का पहला भुगतान एक करोड़ 88 लाख रुपये किसानों के बैंक खातों में भेजा है। वहीं भैसाना चीनी मिल पर पिछले पेराई सत्र का करीब 21 करोड़ रुपये का बकाया चला आ रहा है।
2026-27 सत्र का गन्ना भाव क्या है? 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। केंद्र ने एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती का भाव 400 रुपये और सामान्य किस्म का भाव 390 रुपये प्रति क्विंटल था।
स्रोत: अमर उजाला (5 नवंबर 2026, 31 अक्टूबर 2026), रॉयल बुलेटिन (20 अक्टूबर 2026), न्यूज ट्रैक (2 नवंबर 2026)।
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