मेरठ की किनौनी मिल में पेराई शुरू, मंत्री का दावा — 97% किसानों का भुगतान हो चुका, एसएपी बढ़ाने की सिफारिश

मेरठ के किसानों के लिए गुरुवार का दिन राहत लेकर आया। बजाज हिंदुस्तान लिमिटेड की किनौनी चीनी मिल में पेराई सत्र 2026-27 का औपचारिक शुभारंभ हो गया। गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने मिल की चेन (डोगा) में गन्ना डालकर पेराई का उद्घाटन किया। मंत्री ने दावा किया कि प्रदेश में 97 प्रतिशत गन्ना किसानों का भुगतान हो चुका है और मात्र 3 प्रतिशत भुगतान ही लंबित है। साथ ही उन्होंने कहा कि गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) बढ़ाना कैबिनेट का विषय है, इसलिए वह खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर किसानों के हित में मूल्य बढ़ाने का अनुरोध करेंगे।
किनौनी मिल में उद्घाटन कैसे हुआ
मंत्री ने कहा कि जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें गन्ना विभाग सौंपा था, तब उनके सामने तीन मुख्य उद्देश्य थे — प्रदेश से गन्ना माफिया का खात्मा, घटतौली की शिकायतों पर रोक और किसानों का समय पर भुगतान। मंत्री के अनुसार पहले हरियाणा से सस्ता गन्ना लाकर माफिया यहां बेचते थे, जिसे अब पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, और घटतौली में ऐतिहासिक सुधार हुआ है।
97% भुगतान का दावा — आंकड़े क्या कहते हैं
मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने उद्घाटन के दौरान भुगतान को लेकर बड़े आंकड़े पेश किए। उनके अनुसार आज प्रदेश में 97 प्रतिशत गन्ना किसानों का भुगतान हो चुका है और मात्र 3 प्रतिशत भुगतान ही लंबित है। मंत्री ने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती 15 वर्षों की सरकारों (2002-2017) में किसानों को कुल 1,47,000 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था, जबकि योगी सरकार के कार्यकाल में 3,31,000 करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड भुगतान सीधा किसानों के खातों में भेजा गया है।
ये आंकड़े मंत्री के बयान पर आधारित हैं। असली कसौटी यह है कि किसानों के खाते में पैसा समय पर पहुंचे या नहीं। किनौनी मिल क्षेत्र के किसानों ने पेराई शुरू होने से पहले करीब 2 करोड़ रुपये के बकाए के भुगतान की मांग की थी। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने भी मिल चलने से पहले बकाया दिलाने की मांग उठाई थी।
भुगतान की तस्वीर मिली-जुली है। बिजनौर की बिलाई मिल पर 26 करोड़ रुपये के बकाए को लेकर किसान आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं, जबकि बरेली की नवाबगंज और बहेड़ी मिलों पर भी करोड़ों का बकाया लंबित है। इसलिए भुगतान के दावे और जमीनी हकीकत, दोनों को साथ-साथ देखना जरूरी है।
एसएपी 2026-27 पर अभी फैसला बाकी
गन्ना किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल एसएपी का है। मंत्री ने साफ कहा कि बाजार में चीनी के दाम बढ़े हैं और किसानों की लागत भी बढ़ी है, इसलिए वह खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर किसानों के हित में मूल्य बढ़ाने का अनुरोध करेंगे।
पेराई सत्र 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले पेराई सत्र 2025-26 के लिए अगेती किस्म का गन्ना मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का मूल्य 390 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था। यह दर 2025-26 सत्र की थी, इसे 2026-27 सत्र की दर न समझें। नए सत्र की दर पर फैसला कैबिनेट में होगा।
किसान संगठनों की मांग इससे कहीं आगे है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने गन्ने के दाम में कम से कम 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की मांग की है, ताकि भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल हो। उनका कहना है कि गन्ना उत्पादन की लागत 400 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक हो चुकी है। वहीं भाकियू वर्मा ने 700 रुपये प्रति क्विंटल की मांग उठाई है।
मेरठ की 6 मिलें — कहां क्या स्थिति
मेरठ जिले में कुल छह चीनी मिलें संचालित हैं — दौराला, मवाना, सकौती, नंगलामल, मोहिउद्दीनपुर और किनौनी। मवाना, दौराला और नंगलामल मिल 2 नवंबर से शुरू होनी थीं, जबकि सकौती 4 नवंबर से शुरू होनी थी। किनौनी 2 नवंबर से शुरू होने वाली थी, लेकिन इसकी तारीख 5 नवंबर कर दी गई।
बारिश ने इस बार पेराई की शुरुआत में खलल डाला। अक्टूबर के आखिरी दिनों में हुई भारी बारिश से खेतों में जलभराव हो गया और गन्ने की कटाई-छिलाई रुक गई। मवाना और दौराला मिलों का संचालन भी बारिश के कारण टल गया था। किनौनी के शुरू होने से मेरठ की पेराई व्यवस्था अब पटरी पर लौटने लगी है।
प्रदेश भर में पेराई की रफ्तार
उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 का विधिवत शुभारंभ हो चुका है। गन्ना विकास विभाग के अनुसार प्रदेश की 9 चीनी मिलों में पेराई कार्य शुरू हो चुका है, जबकि कुल 33 चीनी मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिया है। पेराई शुरू करने वाली 9 मिलों में सहकारी क्षेत्र की 1 और निजी क्षेत्र की 8 चीनी मिलें शामिल हैं। सहारनपुर परिक्षेत्र की 3, मेरठ की 1, मुरादाबाद की 2 और लखनऊ की 3 मिलों ने पेराई शुरू कर दी है।
इनके अलावा 24 अन्य चीनी मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी किया है, जिनका संचालन दीपावली से पहले शुरू होना प्रस्तावित है। शेष चीनी मिलें दीपावली के बाद अपना पेराई सत्र शुरू करेंगी। प्रदेश में 47 लाख से अधिक किसान चीनी मिलों को अपना गन्ना बेचते हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि बाढ़ और बेमौसम बारिश से जिन किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुआवजा दिया जाएगा।
किसानों के लिए इसका क्या मतलब है
किनौनी मिल के शुरू होने का सीधा मतलब है कि मेरठ क्षेत्र के किसानों का गन्ना अब मिल में जाना शुरू हो जाएगा। जिन किसानों को पर्ची मिल चुकी है, वे अपने कैलेंडर के अनुसार गन्ना भेज सकते हैं। भुगतान की शिकायत के लिए गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर संपर्क किया जा सकता है, जबकि एसएमएस जानकारी के लिए 51969 शॉर्ट कोड उपलब्ध है।
एसएपी पर फैसला अभी बाकी है। मंत्री का मुख्यमंत्री से मिलने का बयान एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन जब तक कैबिनेट का फैसला नहीं आता, तब तक कोई दर पक्की नहीं मानी जा सकती।
पूछे जाने वाले प्रश्न
किनौनी चीनी मिल का पेराई सत्र कब शुरू हुआ?
गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को शुरू हुआ। गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने मिल की चेन में गन्ना डालकर इसका उद्घाटन किया।
गन्ना मंत्री ने भुगतान को लेकर क्या दावा किया?
मंत्री के अनुसार प्रदेश में 97 प्रतिशत गन्ना किसानों का भुगतान हो चुका है और मात्र 3 प्रतिशत भुगतान लंबित है। योगी सरकार के कार्यकाल में 3,31,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किसानों के खातों में भेजा गया है।
पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का एसएपी क्या है?
पेराई सत्र 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। मंत्री ने कहा है कि गन्ना मूल्य बढ़ाना कैबिनेट का विषय है और वह मुख्यमंत्री से मिलकर मूल्य बढ़ाने का अनुरोध करेंगे। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती किस्म का मूल्य 400 रुपये और सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल था।
मेरठ जिले में कुल कितनी चीनी मिलें हैं?
मेरठ जिले में कुल छह चीनी मिलें हैं — दौराला, मवाना, सकौती, नंगलामल, मोहिउद्दीनपुर और किनौनी। इनकी कुल पेराई क्षमता 48,800 टीसीडी है।
गन्ना भुगतान की शिकायत कहां करें?
गन्ना भुगतान की शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर संपर्क करें। एसएमएस जानकारी के लिए 51969 शॉर्ट कोड उपलब्ध है।
स्रोत: ईटीवी भारत (5 नवंबर 2026), अमर उजाला (29 अक्टूबर 2026), दैनिक संवाद (3 नवंबर 2026), ट्रैक्टर जंक्शन (4 नवंबर 2026), दैनिक जागरण (27 अक्टूबर 2026)
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