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उमस व बारिश के बाद गन्ने में पायरीला और सफेद गिडार का प्रकोप: ICAR-IISR की एडवाइजरी — परजीवी कीट 'एपिरीकैनिया' से जैविक नियंत्रण

Aamir Raza • Sep 24, 2026 • अपडेट: Sep 29, 2026 7:44 AM IST • 4 min read
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उमस व बारिश के बाद गन्ने में पायरीला और सफेद गिडार का प्रकोप: ICAR-IISR की एडवाइजरी — परजीवी कीट 'एपिरीकैनिया' से जैविक नियंत्रण
अंतिम अपडेट: September 29, 2026 7:44 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

लखनऊ / मुरादाबाद / लखीमपुर (CaneUp विशेष ब्यूरो — 24 सितंबर 2026): भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (ICAR-IISR), लखनऊ ने उत्तर प्रदेश के गन्ना बहुल जनपदों (विशेषकर मुरादाबाद, रामपुर, बिजनौर, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत) के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कीट एवं रोग नियंत्रण एडवाइजरी जारी की है। सितंबर के तीसरे सप्ताह में हुई रुक-रुक कर बारिश के बाद खिली तेज धूप और 85% से अधिक उमस के कारण खेतों में पायरीला (गन्ने का फुदका) और सफेद गिडार (White Grub) के पनपने की अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं।

वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यदि समय रहते नियंत्रण न किया गया, तो गन्ने में सुक्रोज की मात्रा (चीनी रिकवरी) में 2 से 3 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ सकती है।


🔴 लाइव अपडेट — 29 सितंबर 2026

पायरीला के ऊपर दिखने वाली सफेद जाली को नष्ट न करें — यह प्राकृतिक जैविक नियंत्रण है: कृषि विज्ञान केंद्र बालोद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. के.आर. साहू ने 28 सितंबर को चेताया कि कई गांवों में ब्लैक फ्लाई और पायरीला का प्रकोप फैला है। कई किसान हल्के भूरे रंग के इस छोटे, तेजी से चलने वाले कीट को चींटी समझकर अनदेखा कर रहे हैं। वैज्ञानिकों की सलाह है कि पायरीला पर दिखने वाली सफेद फंगस जैसी जाली को न नष्ट करें, क्योंकि यही प्राकृतिक जैविक नियंत्रण में मदद करती है, और खेत में मौजूद मित्र कीटों का संरक्षण जरूरी है। रस चूसक कीटों के लिए थायोमेथॉक्साम आधारित दवा एक ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव की सलाह दी गई है; गन्ना घना होने पर पावर स्प्रेयर या ड्रोन का इस्तेमाल करें। (स्रोत: न्यूज18 हिंदी, 28 सितंबर 2026)

बारिश के बाद व्हाइट फ्लाई, वाइट ग्रब और जड़ सड़न का बढ़ा खतरा: बारिश थमने के तुरंत बाद का समय गन्ने के लिए सबसे संवेदनशील होता है। न्यूज18 की 18 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार नमी के चलते सफेद मक्खी का प्रकोप सबसे खतरनाक माना जाता है, जबकि सफेद गिडार जमीन के नीचे रहकर गन्ने की जड़ें खा जाता है, जिससे खड़ी फसल सूखकर गिरने लगती है। कृषि विशेषज्ञों ने कीटों की समय पर पहचान, खेतों से जल निकासी और दवा के इस्तेमाल से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेने पर जोर दिया है, क्योंकि देर से पहचानने पर आधे से ज्यादा नुकसान हो चुका होता है। (स्रोत: न्यूज18 हिंदी, 18 सितंबर 2026)

यूपी में ‘काला चम्पा’ के रूप में पायरीला का हमला, जैविक नियंत्रण ही सबसे असरदार: चिनीमंडी की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश के गन्ना क्षेत्रों में पायरीला कीट ने ‘काला चम्पा’ के नाम से कहर बरपाया है। फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान के मुताबिक यह कीट पत्तियों के निचले हिस्से में छिपकर रस चूसता है और मल-मूत्र छोड़ने से काली फफूंद जम जाती है, जिससे पत्तियां काली पड़ती हैं और सुक्रोज घटने लगता है। किसानों ने बताया कि खेतों में गन्ने की पत्तियों पर बड़ी संख्या में छोटे कीट फड़फड़ाते दिखाई देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बचाव के लिए मित्र कीट ‘एपिरिकैनिया मेलानोल्यूका’ वाला जैविक नियंत्रण सबसे प्रभावी है, और जैविक उपाय काम न करें तो मैलाथियान 50 ईसी एक मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर शाम के समय छिड़काव करें। (स्रोत: चिनीमंडी, सितंबर 2026)


🔍 पायरीला के लक्षण और नुकसान की पहचान

  • लक्षण: गन्ने की पत्तियों की निचली सतह पर हल्के भूरे रंग के फुदकने वाले कीट और उनके सफेद धागे जैसे परजीवी झुंड दिखाई देते हैं।
  • हनीड्यू और काली फफूंद: यह कीट पत्तियों पर मीठा चिपचिपा पदार्थ (Honeydew) उत्सर्जित करता है, जिस पर काली फफूंद (Sooty Mould) जम जाती है। पूरी पत्ती काली पड़ जाती है और पौधा भोजन नहीं बना पाता।
  • प्रभाव: गन्ने का विकास रुक जाता है और अगौला सूखने लगता है, जिससे फसल का वजन 25% तक घट जाता है।

🛡️ वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित 3-स्तरीय नियंत्रण विधि

  1. जैविक नियंत्रण (सर्वोत्तम व लागत मुक्त): पायरीला का सबसे बड़ा प्राकृतिक शत्रु मित्र कीट एपिरीकैनिया मेलानोल्युका (Epiricania melanoleuca) है। इसके कोकून और परजीवी इल्लियां पायरीला के अंडों और वयस्कों को खा जाती हैं। यदि प्रति पत्ती 4-5 कोकून दिखाई दें, तो किसी भी रासायनिक कीटनाशक का छिड़काव बिल्कुल न करें।
  2. सफेद गिडार (White Grub) की रोकथाम: जिन खेतों में गन्ने की जड़ें कटने से पौधे सूख रहे हों, वहां क्लोरपायरीफॉस 20 ईसी (2 लीटर प्रति एकड़) या फिप्रोनिल 0.3% जीआर (8-10 किग्रा प्रति एकड़) सिंचाई के पानी के साथ जड़ों में डालें।
  3. आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित रासायनिक स्प्रे: यदि परजीवी कीट न हों और पायरीला का प्रकोप अत्यधिक हो, तो इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एसएल (100 मिली प्रति 200 लीटर पानी) का छिड़काव पत्तियों के निचले भाग पर करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: एपिरीकैनिया परजीवी के कोकून कैसे पहचाने जाते हैं?

उत्तर: पत्तियों की निचली सतह पर सफेद रुई जैसे छोटे-छोटे अंडाकार कोकून चिपके होते हैं। यह मित्र कीट हैं, इन्हें नष्ट न करें।

प्रश्न 2: क्या पायरीला ग्रसित गन्ने को बीज के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है?

उत्तर: नहीं। पायरीला और सफेद गिडार से प्रभावित खेतों के गन्ने को शरदकालीन बुवाई हेतु बीज के लिए इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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