हरियाणा में गन्ना 430 पर बवाल, किसान मांग रहे 600 रुपये: 12 नवंबर से ट्रैक्टर रैलियां, यूपी के लिए भी संकेत

पड़ोसी राज्य हरियाणा में गन्ने के दाम को लेकर किसानों और सरकार के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। हरियाणा सरकार ने पेराई सीजन 2026-27 के लिए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 430 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जबकि 2027-28 सीजन के लिए यह भाव 450 रुपये प्रति क्विंटल होगा। किसानों का कहना है कि मौजूदा सीजन में महज 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी उनके साथ खुला विश्वासघात है। किसान संगठनों ने इसी सीजन से 600 रुपये प्रति क्विंटल भाव देने की मांग की है और 12 नवंबर से पूरे राज्य में आंदोलन शुरू करने का ऐलान कर दिया है।
यह खबर उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए भी सीधे मायने रखती है। यूपी में 2026-27 सीजन के एसएपी पर सरकार का फैसला अभी बाकी है, और हरियाणा का यह फैसला यूपी की बहस पर भी असर डालेगा।
सरकार ने क्या तय किया — 15 रुपये की बढ़ोतरी पर क्यों भड़के किसान
हरियाणा सरकार की घोषणा के मुताबिक 2026-27 सीजन के लिए गन्ने का भाव 430 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ है। पिछले सीजन यह भाव 415 रुपये प्रति क्विंटल था, यानी बढ़ोतरी सिर्फ 15 रुपये की हुई है। सरकार ने साथ ही अगले सीजन 2027-28 के लिए 450 रुपये प्रति क्विंटल का भाव भी घोषित कर दिया है।
खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल, मजदूरी और सिंचाई की लागत लगातार बढ़ रही है, ऐसे में 15 रुपये की बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर है। किसान नेता जसविंदर मंगलोरा के मुताबिक एक एकड़ गन्ने की खेती पर करीब 80 हजार से 90 हजार रुपये खर्च आते हैं।
4.15 रुपये किलो गन्ना, 70 रुपये किलो चीनी — किसानों का हिसाब
संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े भारतीय किसान यूनियन के हरियाणा अध्यक्ष रतन मान ने इस विरोध का गणित साफ शब्दों में रखा है। उनके मुताबिक किसानों को गन्ने का भाव करीब 4.15 रुपये प्रति किलो मिल रहा है, जबकि बाजार में चीनी की कीमत 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। चीनी और इथेनॉल उद्योग लगातार मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि गन्ना उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इसी वजह से किसान धीरे-धीरे गन्ने की खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। किसान संगठनों की मांग है कि गन्ने का भाव इसी सीजन से 600 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए।
करनाल महापंचायत में अनिश्चितकालीन आंदोलन का फैसला
शुक्रवार को करनाल जिले के मंगलोरा गांव में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले महापंचायत हुई, जिसकी अध्यक्षता युवा किसान नेता जसविंदर मंगलोरा ने की। इसमें सर्वसम्मति से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया।
एसकेएम सदस्य और बीकेयू के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने कहा कि जब तक सरकार भाव बढ़ाने पर सहमत नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलन का पूरा कार्यक्रम — 12 नवंबर से ट्रैक्टर रैलियां
बीकेयू प्रवक्ता सुरेंद्र सांगवान के मुताबिक पहले चरण में 12 से 27 नवंबर तक सोनीपत, करनाल, यमुनानगर, नारायणगढ़, जींद, रोहतक और इंद्री की चीनी मिलों पर ट्रैक्टर रैलियां निकाली जाएंगी।
सांगवान ने चेतावनी दी है कि अगर इसके बाद भी सरकार ने गन्ने के दाम में बढ़ोतरी नहीं की, तो 2 दिसंबर को कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। इस दौरान किसानों की बड़ी महापंचायत भी आयोजित होगी।
भारतीय किसान यूनियन (चरूनी) ने भी अलग मोर्चा खोल दिया है। किसान नेता गुरनाम सिंह चरूनी ने बताया कि 15 दिसंबर को रैली आयोजित की जाएगी, और अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो 2 जनवरी 2027 से गन्ने की कटाई रोकने का आंदोलन शुरू किया जाएगा।
यूपी के किसानों पर क्या असर — एसएपी का फैसला अभी बाकी
हरियाणा का यह टकराव उत्तर प्रदेश के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यूपी में 2026-27 सीजन के एसएपी पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। पेराई सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन सरकार 10 से 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है।
यूपी में 2025-26 सीजन के लिए अगेती किस्म का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का मूल्य 390 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने सरकार से गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है, यानी कम से कम 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी।
एफआरपी और एसएपी में क्या फर्क है
केंद्र सरकार गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) तय करती है — 2026-27 सीजन के लिए यह 365 रुपये प्रति क्विंटल है, जो 10.25 प्रतिशत की मूल चीनी रिकवरी दर से जुड़ा है। इसके ऊपर राज्य अपना राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) घोषित करते हैं, और मिलों को कम से कम एसएपी के बराबर भाव देना होता है। यूपी में पिछले सीजन का एसएपी 400 रुपये था, हरियाणा में नया एसएपी 430 रुपये है।
यूपी में पेराई सत्र की मौजूदा स्थिति
उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 का आगाज हो चुका है। गन्ना विकास विभाग के मुताबिक प्रदेश की 9 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी है, जबकि 33 चीनी मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिया है। प्रदेश में 47 लाख से अधिक किसान चीनी मिलों को अपना गन्ना बेचते हैं।
किसान अभी क्या करें
अपने क्षेत्र की मिल की पेराई और इंडेंट की स्थिति पर नजर रखें, पर्ची और तौल की तारीखों के लिए गन्ना समिति और ई-गन्ना ऐप से जुड़े रहें। तौल और भुगतान का रिकॉर्ड संभालकर रखें, और मिल भुगतान में देरी करे तो जिला गन्ना अधिकारी से शिकायत करें।
पूछे जाने वाले प्रश्न
हरियाणा में गन्ने का नया भाव कितना तय हुआ है? हरियाणा सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए गन्ने का भाव 430 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। 2027-28 के लिए यह 450 रुपये होगा। पिछले सीजन के 415 रुपये के मुकाबले यह सिर्फ 15 रुपये की बढ़ोतरी है।
किसान गन्ने का भाव 600 रुपये क्यों मांग रहे हैं? एक एकड़ गन्ने की खेती पर 80 से 90 हजार रुपये खर्च आता है, जबकि किसानों को गन्ने का भाव सिर्फ 4.15 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। वहीं बाजार में चीनी 70 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। इसी अंतर के कारण किसान 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं।
हरियाणा में किसान आंदोलन कब से शुरू होगा? 12 से 27 नवंबर तक सोनीपत, करनाल, यमुनानगर, नारायणगढ़, जींद, रोहतक और इंद्री की चीनी मिलों पर ट्रैक्टर रैलियां निकाली जाएंगी। मांग नहीं मानी गई तो 2 दिसंबर को कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री आवास का घेराव होगा।
बीकेयू (चरूनी) ने क्या चेतावनी दी है? गुरनाम सिंह चरूनी ने बताया कि 15 दिसंबर को रैली आयोजित की जाएगी। अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो 2 जनवरी 2027 से गन्ने की कटाई रोकने का आंदोलन शुरू किया जाएगा।
यूपी में 2026-27 का गन्ना एसएपी कब तय होगा? यूपी में 2026-27 सीजन के एसएपी पर सरकार का अंतिम फैसला अभी बाकी है। सरकार 10 से 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। पिछले सीजन 2025-26 में अगेती किस्म का एसएपी 400 रुपये और सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल था।
स्रोत: चिनीमंडी (7 नवंबर 2026), गांव जंक्शन (7 नवंबर 2026), बिजनेस स्टैंडर्ड (3 नवंबर 2026), ट्रैक्टर जंक्शन (4 नवंबर 2026)
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