हापुड़: 140 करोड़ बकाया, 21 नवंबर तक बोली टली, सिंभावली-ब्रजनाथपुर की पेराई पर संशय, हजारों किसान परेशान

हापुड़ जिले के गढ़मुक्तेश्वर की सिंभावली और ब्रजनाथपुर चीनी मिलों से जुड़े हजारों गन्ना किसानों के सामने इस बार दोहरी मुसीबत खड़ी हो गई है। एक तरफ पिछले पेराई सत्र का करीब 140 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान अब तक अटका हुआ है, दूसरी तरफ इस सत्र की पेराई शुरू होने पर ही संशय बन गया है। नवंबर का पहला सप्ताह बीतने को है, लेकिन दोनों मिलों में पेराई शुरू होने की कोई तय तारीख सामने नहीं आई है। इसी बीच मिलों की बिक्री के लिए समाधान योजना जमा करने की समयसीमा 5 नवंबर से बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी गई है।
दैनिक जागरण की 6 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों मिलों के 136 क्रय केंद्र दूसरी मिलों को आवंटित कर दिए गए हैं। सिंभावली के पास अब सिर्फ छह और ब्रजनाथपुर के पास सिर्फ चार क्रय केंद्र रह गए हैं। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि पहली बार पेराई सत्र शुरू होने में संशय बन रहा है। खेतों में गन्ना खड़ा है, गेहूं की बुआई का समय निकल रहा है
136 क्रय केंद्र छिने, अब सिर्फ 10 केंद्र बचे
अमर उजाला की 25 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, गन्ना भुगतान में लगातार लापरवाही पर गन्ना आयुक्त के आदेश पर सिंभावली और ब्रजनाथपुर चीनी मिल से 184 गन्ना खरीद केंद्र हटा दिए गए थे। ये केंद्र मेरठ, गाजियाबाद और बुलंदशहर की मिलों को दिए गए। दैनिक जागरण की 6 नवंबर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अब 136 क्रय केंद्र दूसरे जनपद की मिलों को आवंटित किए जा चुके हैं।
जो दस गांव इन मिलों से जुड़े रह गए हैं, उन्होंने केंद्र बदलने की मांग भी उठाई थी। अमर उजाला की 26 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, इन गांवों के किसानों ने गन्ना समिति के सचिवों को केंद्र बदलने के प्रस्ताव दिए थे, लेकिन गन्ना विभाग के अनुसार ये गांव मिलों के साढ़े सात किलोमीटर की परिधि में आते हैं, जिस कारण प्रस्ताव रद्द कर दिए गए।
140 करोड़ का बकाया: आंकड़े अलग-अलग क्यों
दैनिक जागरण की 6 नवंबर की रिपोर्ट में सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिल पर पिछले पेराई सत्र का करीब 140 करोड़ रुपये का बकाया बताया गया है। अमर उजाला की 26 अक्टूबर की रिपोर्ट में यह रकम करीब 160 करोड़ रुपये बताई गई थी, जबकि रॉयल बुलेटिन की 22 अक्टूबर की रिपोर्ट में करीब 109 करोड़ रुपये का बकाया बताया गया था।
आंकड़े तारीख और स्रोत के हिसाब से बदलते हैं, इसलिए किसी एक को अंतिम सत्य न मानें। रकम 100 करोड़ रुपये से ऊपर है और हजारों किसानों का पैसा महीनों से अटका है।
बोली टली: अब 21 नवंबर तक इंतजार
शुगर टाइम्स की 31 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, कर्ज में डूबे सिंभावली समूह की तीन चीनी मिलें, सिंभावली, ब्रजनाथपुर और बहराइच जिले की चिलवरिया, बिक्री के लिए तैयार हैं। 5 नवंबर को बोली लगने की संभावना जताई गई थी।
लेकिन 5 नवंबर को बोली नहीं लगी। कैलकाइन की रिपोर्ट के अनुसार, सिंभावली शुगर्स लिमिटेड ने 5 नवंबर 2026 को शेयर बाजार को दी गई सूचना में बताया कि लेनदारों की समिति की पांचवीं बैठक 4 नवंबर 2026 को हुई थी। इस बैठक में समाधान योजना जमा करने की समयसीमा 5 नवंबर से बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी गई। कंपनी जुलाई 2024 से कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में है। 21 नवंबर तक नए खरीदार का इंतजार करना होगा।
300 करोड़ के कर्ज का पुराना विवाद भी जुड़ा है
दैनिक जागरण की 27 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2011 से 2015 के बीच मिल ने 5,762 किसानों की भूमि-जोत और गन्ना आपूर्ति से जुड़े कागजात बैंक को देकर ऋण योजना के तहत करीब 148.59 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। किसानों का आरोप है कि उनकी सहमति के बिना उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। मामला अब उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ब्याज जुड़ने से रकम अब 300 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है और प्रभावित किसान 20 हजार से अधिक बताए जा रहे हैं।
गेहूं की बुआई पर भी असर, किसान क्या करें
वैठ गांव के किसान हबीब सरवर ने कहा कि शासन सभी केंद्र दूसरी मिलों से जोड़े या दोनों मिलों को क्षमता के अनुसार गन्ना दे। भाकियू भानु के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विजय शर्मा ने पेराई सत्र तुरंत शुरू कराने और पुराना भुगतान दिलाने की मांग की। मिल के महाप्रबंधक करन सिंह ने कहा कि क्षमता के अनुसार गन्ना दिलाने की बात शासन से की जा रही है।
किसान पर्ची और कैलेंडर पर दर्ज केंद्र का नाम जांचें, गन्ना समिति के सचिव से लिखित पुष्टि लें, तौल पर्ची और भुगतान की रसीद संभालकर रखें, और भुगतान न आए तो जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराएं। मदद के लिए सत्यापित हेल्पलाइन टोल-फ्री 1800-121-3203 और 1800-180-5129 हैं, और सरकारी एसएमएस शॉर्टकोड 51969 है।
2026-27 का गन्ना भाव अभी तय नहीं
बिजनेस स्टैंडर्ड की 3 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार इस पेराई सत्र के लिए राज्य परामर्शित मूल्य बढ़ाने पर विचार कर रही है। बढ़ोतरी 10 से 20 रुपये प्रति क्विंटल हो सकती है, जबकि किसान संगठन 50 से 100 रुपये की मांग कर रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है।
2026-27 सत्र के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 के लिए अगेती किस्म का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल, सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल और अनुपयुक्त किस्म का 355 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था। यह पिछले सत्र का भाव है, इसे नए सत्र का भाव मानकर गन्ना न बेचें। केंद्र सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए उचित और लाभकारी मूल्य 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत हो चुकी है। ट्रैक्टर जंक्शन की 4 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की 9 चीनी मिलों में गन्ने की पेराई शुरू हो चुकी है और 33 मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिल के कितने क्रय केंद्र दूसरी मिलों को दिए गए हैं? 136 क्रय केंद्र दूसरी मिलों को आवंटित कर दिए गए हैं। अब सिंभावली के पास छह और ब्रजनाथपुर के पास चार क्रय केंद्र रह गए हैं।
किसानों का कितना गन्ना भुगतान बकाया है? ताजा रिपोर्ट में करीब 140 करोड़ रुपये का बकाया बताया गया है। अलग-अलग तारीखों की रिपोर्टों में यह आंकड़ा 109 करोड़ से 160 करोड़ रुपये के बीच बताया गया है। अपने केंद्र का बकाया गन्ना समिति से लिखित में जानें।
मिलों की बोली कब तक होगी? समाधान योजना जमा करने की समयसीमा 5 नवंबर से बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी गई है।
मेरा गन्ना अब किस मिल को जाएगा, यह कैसे पता चलेगा? पर्ची और कैलेंडर पर दर्ज केंद्र का नाम जांचें और गन्ना समिति के सचिव से लिखित पुष्टि लें।
2026-27 सत्र का गन्ना भाव क्या है? 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती का भाव 400 रुपये और सामान्य किस्म का भाव 390 रुपये प्रति क्विंटल था।
स्रोत: दैनिक जागरण (6 नवंबर 2026, 27 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (25-26 अक्टूबर 2026), कैलकाइन (5 नवंबर 2026), शुगर टाइम्स (31 अक्टूबर 2026), न्यूजट्रैक (27 अक्टूबर 2026), बिजनेस स्टैंडर्ड (3 नवंबर 2026), ट्रैक्टर जंक्शन (4 नवंबर 2026)।
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