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घोसी चीनी मिल दिसंबर के पहले हफ्ते में चलेगी: 80% मरम्मत पूरी, 36,000 किसानों को राहत, 15 लाख क्विंटल पेराई का लक्ष्य

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 8, 2026 • 6 min read
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घोसी चीनी मिल दिसंबर के पहले हफ्ते में चलेगी: 80% मरम्मत पूरी, 36,000 किसानों को राहत, 15 लाख क्विंटल पेराई का लक्ष्य
अंतिम अपडेट: November 8, 2026 6:48 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मऊ जिले के गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। किसान सहकारी चीनी मिल्स लिमिटेड, घोसी की मरम्मत का 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि दिसंबर के पहले सप्ताह में हर हाल में पेराई सत्र शुरू होना चाहिए। इस सत्र में 15 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य रखा गया है। मऊ, बलिया और आजमगढ़ जिलों के करीब 36,000 किसान इस मिल से जुड़े हैं।

जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन की अध्यक्षता में गुरुवार की देर शाम कैंप कार्यालय में मिल की प्रबंध समिति की बैठक हुई, जिसमें तैयारियों और मरम्मत कार्यों की समीक्षा की गई। जिला गन्ना अधिकारी अजीत कुमार पांडेय ने बताया कि मिल हाउस, बॉयलर हाउस, टरबाइन और पावर हाउस में मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है।

डीएम की बैठक में क्या फैसला हुआ

बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट समय-सीमा दी है — नवंबर के अंतिम सप्ताह तक बॉयलर पूजा और दिसंबर के पहले सप्ताह तक डोंगा पूजा कराकर पेराई शुरू कराई जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि दिसंबर के पहले सप्ताह में हर हाल में पेराई शुरू होनी चाहिए, इसमें कोई बहाना नहीं चलेगा।

बैठक में मुख्य अभियंता बृजेन्द्र सिंह, मुख्य लेखाकार सौरभ बंसल और मिल समिति के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। मिल प्रबंधन को निर्देश दिया गया है कि बाकी बचा मरम्मत कार्य तय समय में पूरा किया जाए, ताकि पेराई शुरू होने के बाद मिल बीच सत्र में रुकने की नौबत न आए। पिछले सत्र में तकनीकी खराबी के कारण मिल करीब 198 घंटे बंद रही थी।

4 गन्ना क्रय केंद्र वापस जुड़े

घोसी मिल को लेकर एक और अच्छी खबर यह है कि सठियांव चीनी मिल से संबद्ध किए गए चार गन्ना क्रय केंद्रों को शासन ने वापस घोसी मिल से जोड़ दिया है। इनमें हैदराबाद, मालटड़ी, भुवना बुजुर्ग और देवारा खास राजा क्रय केंद्र शामिल हैं। इन केंद्रों के किसानों को अब अपना गन्ना दूर की मिल में नहीं भेजना पड़ेगा।

यह फैसला किसानों के विरोध के बाद लिया गया। घोसी मिल से क्रय केंद्र हटाने के फैसले के खिलाफ किसानों ने आवाज उठाई थी, जिसके बाद शासन ने चारों केंद्र वापस घोसी से जोड़ दिए।

पिछले सत्र में 198 घंटे बंद रही थी मिल

घोसी मिल का पिछला पेराई सत्र किसानों और मिल प्रबंधन दोनों के लिए मुश्किल भरा रहा। तकनीकी समस्याओं के कारण मिल करीब 198 घंटे बंद रही। रिकवरी दर में गिरावट के बाद गन्ना आयुक्त के निर्देश पर 21 फरवरी को पेराई रोक दी गई थी। बावजूद इसके, 2025-26 सत्र में मिल ने 12.81 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी।

इस बार का 15 लाख क्विंटल का लक्ष्य पिछले सत्र के मुकाबले करीब 17 प्रतिशत ज्यादा है। यह लक्ष्य तभी पूरा होगा जब मिल बिना लंबी रुकावट के चले। घोसी मिल पुरानी है — 4 दिसंबर 1984 को यहां पहली बार पेराई शुरू हुई थी।

36,000 किसानों पर क्या असर

घोसी चीनी मिल से मऊ, बलिया और आजमगढ़ जिलों के लगभग 36,000 किसान जुड़े हैं। इनके लिए मिल का समय पर चलना सिर्फ पेराई का सवाल नहीं है — इससे पूरी फसल चक्र की योजना जुड़ी है। गन्ना समय पर मिल में न जाए तो खेत खाली होने में देरी होती है और रबी की फसल, खासकर गेहूं की बुआई पिछड़ जाती है।

प्रदेश की ज्यादातर मिलें नवंबर में ही पेराई शुरू कर चुकी हैं, लेकिन 6 नवंबर तक प्रदेश की 122 चीनी मिलों में से सिर्फ 19 मिलों में पेराई शुरू हो पाई थी। बारिश के कारण पश्चिमी यूपी में कई मिलों का काम पिछड़ा है। ऐसे में घोसी जैसी पूर्वी यूपी की मिल का दिसंबर में चलना किसानों को कम से कम एक पक्की तारीख देता है।

गन्ना भाव का सवाल — 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी

पेराई की तारीख पक्की होने के बाद किसानों के मन में सबसे बड़ा सवाल गन्ने के भाव का है। 2026-27 पेराई सत्र के लिए राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी बाकी है। सूत्रों के मुताबिक 10 से 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी संभव है, जबकि किसान संगठन 50 से 100 रुपये की बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।

पिछले सत्र 2025-26 के लिए एसएपी अगेती किस्म के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था। जब तक नए सत्र का एसएपी घोषित नहीं होता, किसान पुरानी दर को इस सत्र की दर न समझें।

किसान अभी क्या करें

घोसी मिल क्षेत्र के किसान पेराई शुरू होने से पहले कुछ जरूरी काम निपटा लें। ई-गन्ना ऐप या गन्ना विकास विभाग की वेबसाइट पर अपना सट्टा, सर्वे डाटा और प्री-कैलेंडर जांच लें। अगर नाम, रकबा या किस्म में कोई गलती दिखे तो जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं। पर्ची मिलने पर तौल की तारीख और क्रय केंद्र का नाम ध्यान से देखें — खासकर वे किसान जिनके केंद्र सठियांव से वापस घोसी जुड़े हैं।

गन्ना काटने के बाद उसे ज्यादा देर खेत में न रखें। ताजा कटा गन्ना जल्दी मिल तक पहुंचाने से वजन और चीनी की मात्रा दोनों बेहतर रहती है। भुगतान या पर्ची की शिकायत के लिए गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर संपर्क किया जा सकता है। एसएमएस जानकारी के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 है।

आगे क्या देखना होगा

अब सबकी नजर नवंबर के अंतिम सप्ताह पर होगी, जब बॉयलर पूजा होनी है। अगर मरम्मत का बाकी 20 प्रतिशत काम समय पर पूरा हो जाता है तो दिसंबर के पहले सप्ताह में डोंगा पूजा के साथ पेराई शुरू हो जाएगी। इसके बाद असली परीक्षा मिल के लगातार चलने की होगी — पिछले सत्र की 198 घंटे की बंदी दोबारा न हो, यही किसानों की सबसे बड़ी उम्मीद है।

चीनी मिल की प्रतीकात्मक तस्वीर।

स्रोत: अमर उजाला (7 नवंबर 2026), मऊ खबर (6 नवंबर 2026), नवभारत टाइम्स (28 अक्टूबर 2026 और 16 सितंबर 2026), एग्रीइनसाइट/द टाइम्स ऑफ इंडिया (6 नवंबर 2026), बिजनेस स्टैंडर्ड (3 नवंबर 2026)।

आपके सवाल

घोसी चीनी मिल में पेराई कब शुरू होगी? जिलाधिकारी के निर्देश के मुताबिक दिसंबर 2026 के पहले सप्ताह में हर हाल में पेराई शुरू होनी है। नवंबर के अंतिम सप्ताह तक बॉयलर पूजा और दिसंबर के पहले सप्ताह तक डोंगा पूजा कराई जाएगी।

घोसी मिल में इस सत्र में कितने गन्ने की पेराई का लक्ष्य है? 15 लाख क्विंटल का लक्ष्य रखा गया है। पिछले सत्र 2025-26 में मिल ने 12.81 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी।

घोसी मिल से कितने किसान जुड़े हैं? मऊ, बलिया और आजमगढ़ जिलों के लगभग 36,000 किसान इस सहकारी चीनी मिल से जुड़े हुए हैं।

कौन से 4 गन्ना क्रय केंद्र वापस घोसी मिल से जुड़े हैं? हैदराबाद, मालटड़ी, भुवना बुजुर्ग और देवारा खास राजा — ये चारों केंद्र पहले सठियांव मिल से जोड़ दिए गए थे, अब वापस घोसी मिल से जुड़ गए हैं।

पिछले सत्र में घोसी मिल क्यों बंद रही थी? तकनीकी खराबी के कारण मिल करीब 198 घंटे बंद रही थी। रिकवरी दर में गिरावट के बाद गन्ना आयुक्त के निर्देश पर 21 फरवरी को पेराई रोक दी गई थी।

2026-27 सत्र में गन्ने का भाव क्या मिलेगा? 2026-27 पेराई सत्र के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती किस्म का भाव 400 रुपये और सामान्य किस्म का भाव 390 रुपये प्रति क्विंटल था।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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