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1800-121-3203 पर शिकायत करें: बिना लिखित सहमति के पर्ची डिग्रेड नहीं कर सकती मिल, गन्ना आयुक्त का सख्त आदेश

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 8, 2026 • 6 min read
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1800-121-3203 पर शिकायत करें: बिना लिखित सहमति के पर्ची डिग्रेड नहीं कर सकती मिल, गन्ना आयुक्त का सख्त आदेश
अंतिम अपडेट: November 8, 2026 5:03 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

अगर आप इस पेराई सत्र में अपना गन्ना चीनी मिल को बेचने जा रहे हैं, तो यह खबर आपकी जेब से सीधे जुड़ी है। उत्तर प्रदेश के गन्ना विभाग ने साफ कर दिया है कि अब कोई भी चीनी मिल आपकी गन्ना आपूर्ति पर्ची पर दर्ज प्रजाति को आपकी लिखित सहमति के बिना बदलकर — यानी डिग्रेड करके — तौल नहीं कर सकेगी। अगर कोई मिल ऐसा करती पाई गई, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। शिकायत के लिए विभाग ने टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-121-3203 जारी किया है, जिस पर किसान मुफ्त में कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

पेराई सत्र 2026-27 के बीच लगातार शिकायतें मिलने के बाद विभाग ने इस नियम को फिर से सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। गन्ना आयुक्त कार्यालय को पिछले कुछ दिनों में कई किसानों की शिकायतें मिली थीं कि कुछ मिलें उनकी जानकारी और सहमति के बिना ही पर्ची पर दर्ज किस्म को बदलकर गन्ना खरीद रही हैं।

पर्ची डिग्रेड क्या है और इससे किसान को कितना नुकसान होता है

पर्ची डिग्रेड का मतलब है कि किसान ने जिस अच्छी किस्म का गन्ना उगाया है, मिल उसे पर्ची पर कम गुणवत्ता वाली किस्म का बताकर खरीद ले। उदाहरण के लिए, किसान ने अच्छी क्वालिटी की प्रजाति कोशा 13235 का गन्ना बेचा, लेकिन मिल उसे साधारण प्रजाति का बताकर कम दाम पर तौल ले। कई बार तो किसानों को इसकी जानकारी तक नहीं दी जाती थी। अच्छी प्रजाति का गन्ना ज्यादा दाम पर बिकता है, इसलिए प्रजाति बदलने का सीधा मतलब है किसान को कम दाम मिलना।

गन्ना आयुक्त का सख्त आदेश: तीन बातें जो हर किसान को जाननी चाहिए

गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश की सभी चीनी मिलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। आदेश की तीन सबसे अहम बातें ये हैं:

पहली — लिखित सहमति अनिवार्य: अगर कोई चीनी मिल गन्ने की किस्म डिग्रेड करना चाहती है, तो पहले किसान को पूरी बात सरल भाषा में समझानी होगी और उसकी लिखित सहमति लेना अनिवार्य होगा। बिना सहमति के गन्ना तौलना गलत माना जाएगा।

दूसरी — गन्ना वापस नहीं होगा: किसान द्वारा आपूर्ति के लिए लाया गया गन्ना किसी भी सूरत में वापस नहीं भेजा जाएगा। मिलों को किसानों को पूरी जानकारी देने के बाद ही उनकी सहमति से तौल की कार्रवाई करनी होगी।

तीसरी — दोषी मिलों पर कार्रवाई: गन्ना आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि किसानों की लिखित सहमति के बिना गन्ना पर्ची डिग्रेड कर तौल करने वाली चीनी मिलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिला एवं परिक्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे प्रकरणों की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करें।

मिल पर तौल के समय किसान क्या-क्या जांचें

नियम कितना भी सख्त क्यों न हो, उसका फायदा तभी मिलेगा जब किसान खुद सतर्क रहें। तौल के समय इन बातों पर ध्यान दें:

  • पर्ची पर प्रजाति पढ़ें: तौल से पहले अपनी पर्ची पर दर्ज प्रजाति जरूर देखें। जो प्रजाति आपने बोई है, वही पर्ची पर लिखी होनी चाहिए।
  • हस्ताक्षर से पहले पढ़ें: मिल के कर्मचारी अगर किसी कागज पर हस्ताक्षर करने को कहें, तो पहले उसे पढ़ लें। बिना पढ़े हस्ताक्षर करना ही सबसे बड़ी गलती होती है।
  • तौल पर्ची की फोटो रखें: अपनी गन्ना आपूर्ति पर्ची और तौल पर्ची की फोटो मोबाइल में संभालकर रखें। शिकायत के समय यही आपके सबसे मजबूत सबूत होंगे।
  • दबाव में न आएं: अगर मिल के लोग प्रजाति बदलने का दबाव बनाएं, तो घबराएं नहीं। नियम आपके पक्ष में है।

शिकायत कैसे करें: हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर क्या बताएं

अगर आपके साथ पर्ची डिग्रेड की धांधली हुई है या मिल बिना सहमति के प्रजाति बदलने का दबाव बना रही है, तो तुरंत विभागीय टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-121-3203 पर कॉल करें। यह नंबर पूरी तरह मुफ्त है। कॉल करते समय अपना नाम, गांव, जिला, चीनी मिल का नाम और पर्ची की तारीख तैयार रखें। इसके अलावा, अगर संभव हो तो संबंधित जिला गन्ना अधिकारी को लिखित शिकायत भी दें।

पेराई सत्र 2026-27 में क्यों बढ़ी इस नियम की अहमियत

इस बार का पेराई सत्र पहले से ही किसानों की नजरों में है। प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है और अब तक 9 चीनी मिलों में व्यावसायिक पेराई शुरू हो गई है, जबकि 33 मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिए हैं। प्रदेश के 47 लाख से अधिक किसान चीनी मिलों को अपना गन्ना बेचते हैं और इस सत्र में 28.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती हुई है।

इतने बड़े पैमाने पर जब गन्ना मिलों तक पहुंच रहा है, तो तौल और पर्ची से जुड़ी छोटी सी गड़बड़ी भी लाखों किसानों की आमदनी पर असर डाल सकती है। इसीलिए गन्ना विभाग ने पेराई के बीच में निगरानी तेज कर दी है। जिला स्तर पर तैनात अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मिलों द्वारा की जा रही गन्ना खरीद की प्रक्रिया पर नजर रखें, किसानों से बातचीत करें और उनकी समस्याएं जानें।

गन्ना भाव पर भी टिकी है किसानों की नजर

पर्ची डिग्रेड के नियम के साथ-साथ किसानों की नजर गन्ने के भाव पर भी टिकी है। पेराई सत्र 2026-27 के लिए राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी बाकी है। पिछले पेराई सत्र 2025-26 में अगेती किस्म का गन्ना मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का मूल्य 390 रुपये प्रति क्विंटल था। किसान संगठनों ने इस बार 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की मांग की है, जबकि भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग रखी है। चीनी मिलों ने भाव यथावत रखने की मांग की है।

जब तक नया एसएपी घोषित नहीं होता, पर्ची पर दर्ज प्रजाति ही किसान के दाम की सबसे बड़ी गारंटी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: क्या मिल बिना बताए मेरी पर्ची पर दर्ज प्रजाति बदल सकती है? उत्तर: नहीं। गन्ना विभाग के आदेश के अनुसार, किसान की लिखित सहमति के बिना कोई भी चीनी मिल पर्ची पर दर्ज प्रजाति को डिग्रेड करके तौल नहीं कर सकती। ऐसा करना नियम के खिलाफ है और दोषी मिल पर कार्रवाई होगी।

प्रश्न: पर्ची डिग्रेड की शिकायत कहां करें? उत्तर: टोल फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर कॉल करें। जिला गन्ना अधिकारी को लिखित शिकायत भी दे सकते हैं। अपनी पर्ची की फोटो संभालकर रखें।

प्रश्न: अगर मैं प्रजाति बदलने पर सहमत नहीं हुआ, तो क्या मिल मेरा गन्ना वापस भेज सकती है? उत्तर: नहीं। आदेश में साफ कहा गया है कि किसान द्वारा आपूर्ति के लिए लाया गया गन्ना किसी भी सूरत में वापस नहीं भेजा जाएगा।

प्रश्न: इस नियम से मुझे क्या फायदा होगा? उत्तर: अच्छी प्रजाति का गन्ना ज्यादा दाम पर बिकता है। पर्ची डिग्रेड पर रोक लगने से आपको आपकी फसल का सही दाम मिलेगा और मिल की मनमानी पर रोक लगेगी।

प्रश्न: 2026-27 सत्र का एसएपी घोषित हुआ है या नहीं? उत्तर: अभी नहीं। पेराई सत्र 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती किस्म का भाव 400 रुपये और सामान्य किस्म का भाव 390 रुपये प्रति क्विंटल था।

स्रोत: ट्रैक्टर जंक्शन (8 नवंबर 2026 को अपडेट), गांव कनेक्शन (25 फरवरी 2026)। गन्ना आयुक्त के आदेश और हेल्पलाइन नंबर की जानकारी दोनों प्रकाशनों में दर्ज है।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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