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1300 क्विंटल उपज वाली गन्ने की नई किस्म सीओ-20016 आई, को.0238 से 100 क्विंटल ज्यादा — बीज कब मिलेगा?

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 8, 2026 • 6 min read
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1300 क्विंटल उपज वाली गन्ने की नई किस्म सीओ-20016 आई, को.0238 से 100 क्विंटल ज्यादा — बीज कब मिलेगा?
अंतिम अपडेट: November 8, 2026 11:46 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

सहारनपुर के गन्ना किसानों के लिए बड़ी उम्मीद की खबर है। गन्ने की नई किस्म सीओ-20016 के ट्रायल में करीब 1300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज मिली है, जबकि आज यूपी में सबसे ज्यादा बोई जाने वाली किस्म को.0238 से करीब 1200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर ही उपज मिल रही है। यानी नई किस्म से हर हेक्टेयर पर करीब 100 क्विंटल ज्यादा गन्ना मिलने का दावा है। यह किस्म लाल सड़न रोग से भी सुरक्षित बताई जा रही है, जिसने को.0238 की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है।

भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, कोयंबटूर ने अगेती प्रजाति सीओ-20016 और सामान्य प्रजाति सीओ-18222 को विकसित किया है। मुजफ्फरनगर के रोहाना क्षेत्र के गांव बड़कली से करीब 184 क्विंटल बीज लाकर क्षेत्र के 41 गांवों के 76 प्रगतिशील किसानों को बांटा गया है। गन्ना विभाग को उम्मीद है कि जनवरी 2027 में कोर कमेटी की बैठक के बाद दोनों किस्मों को रिलीज कर दिया जाएगा और फरवरी 2027 की बसंतकालीन बुवाई के लिए किसानों को बीज मिल सकेगा।

को.0238 की मुसीबत — लाल सड़न ने घटा दी चीनी

पिछले करीब एक दशक से को.0238 यूपी के गन्ना किसानों की सबसे भरोसेमंद किस्म रही है, लेकिन अब यही किस्म उनकी सबसे बड़ी चिंता बन गई है। को.0238 लाल सड़न नाम के फफूंद रोग के प्रति बेहद संवेदनशील है। रोग लगते ही गन्ने के अंदर का गूदा लाल होकर सड़ने लगता है, वजन घटता है और चीनी की रिकवरी गिर जाती है।

इसका असर पूरे प्रदेश के चीनी उत्पादन पर दिखा है। उत्तर प्रदेश का चीनी उत्पादन 2019-20 के 126.4 लाख टन से घटकर 2025-26 में 89.5 लाख टन रह गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह को.0238 में लाल सड़न का फैलाव है। पश्चिमी यूपी के कई जिलों में किसान लगातार शिकायत कर रहे हैं कि को.0238 की फसल में रोग लगने से उनकी उपज और आमदनी दोनों घट रही हैं।

इसीलिए विभाग और उद्योग लंबे समय से ऐसी किस्म की तलाश में थे जो को.0238 जितनी उपज दे, लेकिन लाल सड़न से सुरक्षित भी रहे।

सीओ-20016 और सीओ-18222 क्या हैं

सीओ-20016 अगेती किस्म है और सीओ-18222 सामान्य किस्म है। दोनों को कोयंबटूर स्थित गन्ना प्रजनन संस्थान ने विकसित किया है। मई महीने में अखिल भारतीय समन्वित गन्ना अनुसंधान परियोजना की किस्म पहचान समिति ने सीओ-20016 को को.0238 के संभावित विकल्प के रूप में चुना था। इस किस्म को करण-20 के नाम से भी जाना जा रहा है।

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने देश के 16 चीनी मिल क्षेत्रों में तीन साल तक इस किस्म का परीक्षण कराया, जिनमें यूपी की 11 मिलें शामिल थीं। तीन साल के औसत में सीओ-20016 की उपज 144.6 टन प्रति हेक्टेयर रही, जबकि को.0238 की उपज 116.4 टन प्रति हेक्टेयर रही। दस महीने की फसल में गन्ने के रस में मिठास भी सीओ-20016 में 18.7 प्रतिशत रही, जबकि को.0238 में यह 18.3 प्रतिशत थी।

सबसे अहम बात यह है कि सीओ-20016 लाल सड़न के खतरनाक सीएफ-13 प्रकार के प्रति प्रतिरोधी पाई गई है। हालांकि ये आंकड़े परीक्षणों के हैं — हर खेत में समान उपज की गारंटी नहीं होती, मिट्टी, मौसम और सिंचाई से नतीजे बदल सकते हैं।

सहारनपुर में पौध तैयार, 76 किसानों को बीज बांटा गया

सहारनपुर में गन्ना विभाग के सहयोग से बिड़वी चीनी मिल इन दोनों किस्मों की पौध तैयार कराने में जुटी है। मिल के एजीएम विकास सिंह के मुताबिक ट्रायल में दोनों किस्मों से करीब 1300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन मिला है।

बीज की व्यवस्था के लिए मुजफ्फरनगर के रोहाना क्षेत्र के गांव बड़कली से करीब 184 क्विंटल बीज लाया गया है। यह बीज क्षेत्र के 41 गांवों के 76 प्रगतिशील किसानों को वितरित किया गया है, ताकि वे अपने खेतों में इसकी बुवाई करके प्रदर्शन कर सकें। पिछले महीने किसानों ने करनाल में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक से मिलकर सीओ-20016 के रिलीज पर आभार भी जताया था।

बीज कब मिलेगा और किसान क्या करें

गन्ना विभाग के मुताबिक जनवरी 2027 में कोर कमेटी की बैठक प्रस्तावित है। इसके बाद दोनों किस्मों के रिलीज होने की उम्मीद है। मंजूरी मिलने पर फरवरी 2027 की बसंतकालीन बुवाई के लिए किसानों को बीज उपलब्ध कराने की योजना है।

लेकिन यहां एक जरूरी सावधानी है। दोनों किस्में अभी औपचारिक रिलीज की प्रक्रिया में हैं। मंजूरी से पहले बड़े क्षेत्र में इनकी बुवाई नहीं करनी चाहिए। बीज अपने जिला गन्ना अधिकारी या नजदीकी चीनी मिल से संपर्क करके ही लें। बाजार में इस किस्म के नाम पर महंगे दाम पर बेचा जा रहा बीज बिना जांच के न खरीदें। पहले छोटे क्षेत्र में प्रदर्शन बुवाई करके किस्म को अपने खेत की मिट्टी और पानी के हिसाब से परखें।

एसएपी का सवाल — भाव पर भी नजर रखें

आमदनी का दूसरा पहलू गन्ने का भाव है। केंद्र सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर लागू होगा। पिछले सत्र में यह 355 रुपये था।

उत्तर प्रदेश में 2025-26 सत्र के लिए राज्य परामर्श मूल्य अगेती किस्म के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल, सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये और अनुपयुक्त किस्म के लिए 355 रुपये तय हुआ था। 2026-27 सत्र के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। किसान संगठन कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं, जबकि खबरों के मुताबिक सरकार 10 से 20 रुपये की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। पेराई सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है और प्रदेश की 122 चीनी मिलों में से 19 में पेराई शुरू हो गई है, इसलिए एसएपी के फैसले पर सबकी नजर है।

किसान अभी क्या करें

पहला, अपनी मौजूदा को.0238 की फसल पर लाल सड़न की नजर रखें। रोग दिखते ही प्रभावित गन्ना अलग करें और गन्ना विभाग को जानकारी दें। दूसरा, बीज के लिए जिला गन्ना अधिकारी या अपनी चीनी मिल से संपर्क में रहें और बीज आधिकारिक स्रोत से ही लें। तीसरा, फरवरी 2027 की बसंतकालीन बुवाई की तैयारी अभी से करें, ताकि बीज मिलते ही बुवाई में देरी न हो। चौथा, अपने खेत में पहले एक छोटा प्रदर्शन प्लॉट लगाकर देखें कि किस्म आपकी मिट्टी और सिंचाई में कैसा प्रदर्शन करती है। उसके बाद ही बड़े क्षेत्र में बुवाई का फैसला लें।

आपके सवाल

सीओ-20016 किस्म का बीज कब मिलेगा?

जनवरी 2027 की कोर कमेटी बैठक के बाद रिलीज की उम्मीद है। मंजूरी मिलने पर फरवरी 2027 की बसंतकालीन बुवाई के लिए बीज मिलेगा।

सीओ-20016 से कितनी ज्यादा उपज मिलेगी?

ट्रायल में इस किस्म से करीब 1300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज मिली है, जबकि को.0238 से करीब 1200 क्विंटल। तीन साल के परीक्षणों में औसत उपज 144.6 टन प्रति हेक्टेयर रही, जबकि को.0238 की 116.4 टन रही।

क्या यह किस्म लाल सड़न से सुरक्षित है?

हां, परीक्षणों में यह लाल सड़न के खतरनाक सीएफ-13 प्रकार के प्रति प्रतिरोधी पाई गई है।

क्या किसान अभी इस किस्म की बुवाई कर सकते हैं?

नहीं, बड़े क्षेत्र में बुवाई से पहले औपचारिक रिलीज का इंतजार करें। अभी सिर्फ प्रदर्शन बुवाई के लिए चुनिंदा किसानों को बीज दिया जा रहा है।

सीओ-18222 किस्म क्या है?

सीओ-18222 सामान्य प्रजाति की किस्म है, जिसे भी कोयंबटूर संस्थान ने विकसित किया है। यह सीओ-20016 के साथ ही रिलीज की प्रक्रिया में है।

स्रोत: दैनिक जागरण, इंडियन एक्सप्रेस, रीडमी लाउड, किसान तक, बिजनेस स्टैंडर्ड

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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