3 चीनी मिलों पर वसूली प्रमाण-पत्र जारी, केसर-बर्खेड़ा की कुर्की: 162 करोड़ बकाया पर सख्ती, 10 हजार किसानों को राहत

उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों का बकाया भुगतान दिलाने के लिए सरकार ने सख्ती का दूसरा दौर शुरू कर दिया है। गन्ना विकास विभाग ने भुगतान में लापरवाही बरतने वाली तीन चीनी मिलों — गोला, पलिया और खंभारखेड़ा — के खिलाफ वसूली प्रमाण-पत्र (आरसी) जारी कर दिए हैं। अब इन मिलों से बकाया रकम जिला प्रशासन भू-राजस्व के बकाए की तरह वसूलेगा, यानी मिल की संपत्ति कुर्क करके भी किसानों का पैसा दिलाया जा सकता है।
तीन मिलों पर आरसी — अब जिला प्रशासन वसूलेगा बकाया
प्रमुख सचिव, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास, वीना कुमारी के निर्देश पर गन्ना मूल्य भुगतान में लापरवाही बरतने पर गोला, पलिया और खंभारखेड़ा चीनी मिलों के खिलाफ वसूली प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं। गन्ना आयुक्त ने बताया कि इन मिलों ने समय पर भुगतान नहीं किया, इसलिए इनके विरुद्ध राजस्व वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई है। निर्गत वसूली प्रमाण-पत्र के क्रम में संबंधित जिला प्रशासन भू-राजस्व के बकाए की तरह ही वसूली कर सकेगा। गन्ना विभाग का कहना है कि भुगतान की प्रतिदिन समीक्षा की जा रही है और अन्य मिलों को भी सख्त चेतावनी दी गई है कि यदि उन्होंने शीघ्र भुगतान नहीं किया तो उनके खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
किसानों के लिए आरसी का मतलब समझना जरूरी है। सामान्य नोटिस में मिल को सिर्फ भुगतान करने को कहा जाता है, लेकिन आरसी जारी होने के बाद तहसील प्रशासन मिल की अचल संपत्ति चिह्नित करके कुर्की कर सकता है और तय समय में भुगतान न होने पर नीलामी से रकम वसूल सकता है। यही वजह है कि आरसी को गन्ना विभाग का सबसे सख्त हथियार माना जाता है।
केसर मिल: 11.33 करोड़ मिले, 162 करोड़ अभी बाकी
बरेली जिले की बहेड़ी स्थित केसर चीनी मिल का मामला इस सख्ती का सबसे ताजा उदाहरण है। प्रशासन की सख्ती और किसानों के आंदोलन की चेतावनी के बाद मिल प्रबंधन ने शुक्रवार को 11 करोड़ 33 लाख रुपये जारी कर दिए। गन्ना समिति ने रकम किसानों के खातों में पहुंचाने के लिए बैंकों को एडवाइज भेज दी।
लेकिन केसर मिल पर किसानों का कुल बकाया अब भी करीब 162 करोड़ रुपये है। परेशान किसानों ने 30 अक्टूबर को धरना देकर दीपावली तक भुगतान न होने पर चक्का जाम की चेतावनी दी थी। इसके बाद 2 नवंबर को एसडीएम बहेड़ी गोपाल शर्मा के नेतृत्व में प्रशासनिक और राजस्व विभाग की टीम भारी पुलिस बल के साथ चीनी मिल पहुंची। प्रशासन ने मिल को 10 नवंबर तक भुगतान की दिशा में ठोस कदम उठाने का समय दिया है — यदि तब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए तो मिल की संपत्तियां सील करने के साथ ही एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। मिल की 11 एकड़ से अधिक जमीन की नीलामी 17 नवंबर को प्रस्तावित है।

162 करोड़ बकाया: 3 मिलों पर RC, कुर्की-नीलामी
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पीलीभीत जिले की बर्खेड़ा चीनी मिल पर भी किसानों का 112 करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना मूल्य बकाया है। मामले में उच्च न्यायालय की ओर से आख्या मांगी गई, जिसके बाद प्रशासन ने वसूली की कार्रवाई तेज कर दी। बीसलपुर एसडीएम नागेंद्र पांडेय ने बताया कि तहसील प्रशासन ने मिल की अचल संपत्तियों को चिह्नित कर कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि मिल प्रबंधन ने जल्द बकाया रकम जमा नहीं की तो कुर्क की गई संपत्ति की नीलामी के माध्यम से वसूली की जाएगी।
122 मिलों में भुगतान की ताजा स्थिति
पेराई सत्र 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश की 122 संचालित चीनी मिलों में से 51 मिलों ने 100 प्रतिशत भुगतान कर दिया है, जबकि 34 मिलों ने 84 प्रतिशत से अधिक भुगतान किया है। कुल मिलाकर 122 में से 85 मिलों ने 84 प्रतिशत से ज्यादा भुगतान कर दिया है। गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने 5 नवंबर को मेरठ की किनौनी चीनी मिल के पेराई सत्र के शुभारंभ पर कहा था कि आज उत्तर प्रदेश में 97 प्रतिशत गन्ना किसानों का भुगतान हो चुका है और मात्र 3 प्रतिशत भुगतान ही लंबित है।
पेराई सत्र 2026-27 की बात करें तो प्रदेश की 9 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी है और 33 मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिया है।
2026-27 एसएपी पर फैसला बाकी
गन्ने के भाव को लेकर किसानों की नजर अब राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) के फैसले पर टिकी है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए अगेती किस्म का गन्ना मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का मूल्य 390 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था। पेराई सत्र 2024-25 के लिए अगेती किस्म का भाव 370 रुपये, सामान्य किस्म का 360 रुपये और कम रिकवरी वाले गन्ने का 355 रुपये प्रति क्विंटल था। पेराई सत्र 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है — सरकार की ओर से अब तक इस सत्र का नया भाव तय नहीं किया गया है। किसान संगठनों ने भाव में कम से कम 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की मांग की है और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग रखी है।
किसान अभी क्या करें
अगर आपका गन्ना भुगतान अटका हुआ है तो सबसे पहले अपनी मिल और गन्ना समिति से भुगतान की स्थिति लिखित में पूछें। पर्ची, तौल और भुगतान से जुड़ी कोई भी शिकायत हो तो गन्ना विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराएं। अपनी पर्ची और कैलेंडर की स्थिति ई-गन्ना ऐप या caneup.in पर नियमित रूप से जांचते रहें।
अगर मिल ने बिना आपकी लिखित सहमति के पर्ची पर दर्ज किस्म को डिग्रेड करके तौल की है, तो यह गलत है — गन्ना विभाग ने साफ कर दिया है कि किसान की लिखित सहमति के बिना कोई भी चीनी मिल गन्ना आपूर्ति पर्ची पर दर्ज प्रजाति को डिग्रेड करके तौल नहीं कर सकती। ऐसी स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन पर शिकायत करें और अपनी पर्ची की फोटो संभालकर रखें।
आपके सवाल
वसूली प्रमाण-पत्र (आरसी) क्या होता है? आरसी एक कानूनी आदेश है, जिसके बाद जिला प्रशासन बकाया रकम को भू-राजस्व के बकाए की तरह वसूल सकता है — मिल की संपत्ति कुर्क करके और नीलामी से किसानों का पैसा दिलाकर।
गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिलों पर आरसी क्यों जारी हुई? इन तीनों मिलों ने समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया था। प्रमुख सचिव वीना कुमारी के निर्देश पर गन्ना विकास विभाग ने इनके खिलाफ आरसी जारी करके राजस्व वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
केसर चीनी मिल पर किसानों का कितना बकाया है? केसर चीनी मिल पर किसानों का करीब 162 करोड़ रुपये बकाया है। मिल ने 11.33 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिससे करीब 10 हजार किसानों को राहत मिली है। 10 नवंबर तक ठोस कदम न उठाए गए तो संपत्ति सील और एफआईआर की कार्रवाई होगी।
गन्ना भुगतान की शिकायत कहां करें? गन्ना विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा जिला गन्ना अधिकारी के कार्यालय में भी लिखित शिकायत दी जा सकती है।
2026-27 सत्र के लिए गन्ने का भाव (एसएपी) क्या तय हुआ है? पेराई सत्र 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए अगेती किस्म का भाव 400 रुपये और सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल था।
स्रोत: ट्रैक्टर जंक्शन, अमृत विचार, अमर उजाला, ईटीवी भारत, डायनामाइट न्यूज़, शारदा एक्सप्रेस
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