5 नवंबर तक चीनी उत्पादन 4 गुना बढ़कर 12.85 लाख टन, 184 मिलों में पेराई शुरू — यूपी के 19 मिलों से सिर्फ 20 हजार टन

देश में चीनी का उत्पादन इस बार ऐसी रफ्तार से बढ़ा है कि गन्ना किसान भी हैरान हैं। अक्टूबर से शुरू हुए चीनी सत्र 2026-27 में 5 नवंबर तक देशभर में 12.85 लाख टन चीनी बन चुकी है, जबकि पिछले साल इसी तारीख तक सिर्फ 3.20 लाख टन बनी थी। यानी एक साल में उत्पादन करीब चार गुना हो गया है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) ने 6 नवंबर को जारी अपने बयान में ये आंकड़े दिए हैं।
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए इस खबर का एक खास मतलब है। देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य में अभी सिर्फ 19 मिलों में पेराई शुरू हुई है, और इनसे अब तक सिर्फ 20 हजार टन चीनी बनी है। पश्चिमी यूपी की ज्यादातर बाकी मिलें अगले कुछ दिनों में चलने की उम्मीद है, जबकि मध्य यूपी की मिलें दीपावली के बाद पेराई शुरू करेंगी।
184 मिलों में पेराई शुरू, पिछले साल 154 थीं
इस्मा के आंकड़ों के मुताबिक, 5 नवंबर 2026 तक देशभर की 184 चीनी मिलों में गन्ने की पेराई शुरू हो चुकी है। पिछले साल इसी अवधि तक सिर्फ 154 मिलों में काम शुरू हुआ था। यानी इस बार 30 ज्यादा मिलें पेराई कर रही हैं। इस्मा के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में और मिलों के चालू होने के साथ चीनी उत्पादन में तेजी आने की उम्मीद है।
महाराष्ट्र सबसे आगे — 136 मिलें, 10.78 लाख टन चीनी
चीनी उत्पादन के मामले में महाराष्ट्र इस बार सबसे आगे है। राज्य में 5 नवंबर तक 136 चीनी मिलों ने पेराई शुरू कर दी थी, और वहां 10.78 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। पिछले साल इसी तारीख तक राज्य की 101 मिलों में पेराई शुरू हुई थी और उत्पादन सिर्फ 1.23 लाख टन था। यानी महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन करीब नौ गुना हो गया है — देश में अब तक बनी कुल चीनी का 84 फीसदी से ज्यादा हिस्सा अकेले इसी राज्य से आया है।
उत्तर प्रदेश: 19 मिलें चलीं, सिर्फ 20 हजार टन चीनी
उत्तर प्रदेश में पेराई की रफ्तार अभी धीमी है — पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों की सिर्फ 19 मिलों में पेराई शुरू हुई है, और इनसे अब तक सिर्फ 20,000 टन चीनी बनी है। प्रदेश की कुल 122 मिलों में से 33 ने गन्ना खरीद का इंडेंट जारी कर दिया है, और 24 मिलों का दीपावली से पहले चलना प्रस्तावित है।
यूपी में पेराई की धीमी शुरुआत की एक बड़ी वजह अक्टूबर के आखिरी दिनों में हुई भारी बारिश भी रही है। बारिश से खेतों में पानी भर गया, कटाई-छिलाई रुकी और कई मिलों की तारीखें आगे बढ़ीं। बिजनौर जिले में धामपुर चीनी मिल का पेराई सत्र 5 नवंबर के बजाय 11 नवंबर से शुरू होगा। बागपत और रमाला की सहकारी चीनी मिलों का उद्घाटन हो चुका है, लेकिन वहां भी पेराई शुरू नहीं हो पाई है।
कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और तेलंगाना की स्थिति
महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों में भी पेराई शुरू हो गई है। कर्नाटक में सात मिलों ने अब तक 90 हजार टन चीनी का उत्पादन किया है। तमिलनाडु में भी सात मिलों ने 64 हजार टन चीनी बनाई है। गुजरात में 12 और तेलंगाना में तीन मिलों ने भी पेराई शुरू कर दी है।
36 लाख टन का शुरुआती भंडार — चीनी की कमी नहीं होगी
इस्मा के मुताबिक, पिछले सत्र से करीब 36 लाख टन चीनी का भंडार बचा है। महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा है कि नए सत्र के बढ़ते उत्पादन के साथ घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है, सप्लाई की चिंता नहीं है।
इसका मतलब ये है कि आने वाले महीनों में चीनी की कीमतों में अचानक उछाल की आशंका कम है। लेकिन ज्यादा उत्पादन से दाम दबाव में भी आ सकते हैं, जिसका असर मिलों की भुगतान क्षमता पर पड़ सकता है।
जल्दी पेराई पर रिकवरी का सवाल
इस वर्ष पेराई जल्दी शुरू होने से गन्ने की रिकवरी पर सवाल उठ रहे हैं — कच्चे गन्ने में चीनी कम होती है, तो मिलों को ज्यादा गन्ना पेरकर कम चीनी मिलती है।
बिजनौर जैसे जिलों में बारिश से गन्ने में नमी बढ़ी है, जिससे रिकवरी घट सकती है। इसलिए पर्ची के हिसाब से ही पका गन्ना भेजें, कच्चा गन्ना काटकर न भेजें।
यूपी के किसानों के लिए इसका क्या मतलब — एसएपी का फैसला अभी बाकी
यूपी के 47 लाख से ज्यादा गन्ना किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल दाम का है — 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए अगेती किस्म का एसएपी 400 रुपये और सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल तय था।
बिजनेस स्टैंडर्ड की 3 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार एसएपी में 10 से 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है, जबकि किसान संगठन 50 से 100 रुपये की बढ़ोतरी मांग रहे हैं। भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा है कि लागत 400 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर है, इसलिए भाव 500 रुपये होना चाहिए। मिल मालिकों ने किसी भी बढ़ोतरी का विरोध किया है।
किसान इस बीच क्या करें
पेराई सत्र की शुरुआत में किसानों को कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। गन्ना सिर्फ पर्ची के हिसाब से ही भेजें — पर्ची की तारीख से पहले या बाद में गन्ना भेजने पर तौल और भुगतान में दिक्कत आ सकती है। अपनी पर्ची और भुगतान की स्थिति caneup.in पोर्टल पर समय-समय पर जांचते रहें। अगर मिल भुगतान में देरी कर रही है, तो गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें; गन्ना विभाग का टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 है। बारिश के बाद खेत सूखने पर ही गन्ना काटें, ताकि नमी कम हो और रिकवरी बेहतर रहे।
आपके सवाल
देश में अब तक कितनी चीनी बनी है?
2026-27 सत्र में 5 नवंबर तक देशभर में 12.85 लाख टन चीनी बनी है, पिछले साल के 3.20 लाख टन के मुकाबले करीब चार गुना।
यूपी में कितनी मिलें चल रही हैं और कितनी चीनी बनी है?
उत्तर प्रदेश में अब तक 19 चीनी मिलों में पेराई शुरू हुई है, और इनसे 20,000 टन चीनी बनी है। प्रदेश की कुल 122 मिलों में से बाकी मिलें दीपावली के आसपास और बाद में चालू होंगी।
महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन इतना ज्यादा क्यों है?
महाराष्ट्र में 136 मिलों से 10.78 लाख टन चीनी बनी है; पिछले साल 101 मिलों से सिर्फ 1.23 लाख टन बनी थी — मिलों के जल्दी चालू होने से उत्पादन करीब नौ गुना बढ़ा।
क्या देश में चीनी की कमी होगी?
नहीं। पिछले सत्र से करीब 36 लाख टन चीनी का भंडार बचा है, और नए सत्र का उत्पादन भी तेजी से बढ़ रहा है।
2026-27 के लिए गन्ने का एसएपी कब घोषित होगा?
घोषणा अभी बाकी है। सरकार 10 से 20 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ोतरी पर विचार कर रही है, किसान संगठन 500 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं।
किसान अपनी पर्ची और भुगतान की स्थिति कैसे देखें?
किसान caneup.in पोर्टल पर जाकर अपना गन्ना कैलेंडर, पर्ची और भुगतान की स्थिति देख सकते हैं। किसी शिकायत के लिए गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर संपर्क करें।
स्रोत: रूरल वॉइस, 6 नवंबर 2026; बिज़नेस स्टैंडर्ड हिंदी, 6 नवंबर 2026; चिनीमंडी, 3 नवंबर 2026
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