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31 अक्टूबर तक देश की 152 मिलों में पेराई शुरू, 8.45 लाख टन चीनी बनी — यूपी में बारिश से सिर्फ 3 मिलें चल पाईं

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 3, 2026 • 6 min read
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31 अक्टूबर तक देश की 152 मिलों में पेराई शुरू, 8.45 लाख टन चीनी बनी — यूपी में बारिश से सिर्फ 3 मिलें चल पाईं
अंतिम अपडेट: November 3, 2026 7:31 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत तेज़ हुई है, पर यूपी अब तक पीछे है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ (एनएफसीएसएफ) की रिपोर्ट के अनुसार 31 अक्टूबर 2026 तक देश की 152 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी थी, जिन्होंने 105.43 लाख टन गन्ना पेरकर 8.45 लाख टन चीनी बनाई है। पिछले साल इसी तारीख तक सिर्फ 31 मिलें चल रही थीं, जिनका उत्पादन मात्र 1 लाख टन था। लेकिन यूपी में 31 अक्टूबर तक सिर्फ 3 मिलें ही चल पाईं, जबकि पिछले साल 10 मिलें चल रही थीं — अक्टूबर की बारिश ने पश्चिमी यूपी में कटाई, ढुलाई और मिलों की तैयारी तीनों को प्रभावित किया।

महाराष्ट्र आगे, यूपी पीछे: राज्यवार तस्वीर

शुरुआती पेराई की कमान महाराष्ट्र के हाथ में है। उसकी 123 मिलों ने 91.14 लाख टन गन्ना पेरकर 7.20 लाख टन चीनी बनाई है — देश की कुल 152 चालू मिलों में से लगभग 81 प्रतिशत अकेले महाराष्ट्र की हैं, जबकि पिछले साल अक्टूबर में वहां सिर्फ 2 मिलें चली थीं। केंद्र सरकार ने त्योहारी सीज़न में आपूर्ति बनाए रखने के लिए जल्दी पेराई का आग्रह किया था, और महाराष्ट्र की मिलों ने इस पर सबसे तेज़ अमल किया है।

कर्नाटक की 7 मिलों ने 8.33 लाख टन गन्ने से 80 हज़ार टन और तमिलनाडु की 7 मिलों ने 4.71 लाख टन गन्ने से 40 हज़ार टन चीनी बनाई है। गुजरात की 10 और तेलंगाना की 2 मिलों ने भी पेराई शुरू की है। यूपी की स्थिति भी ऐसी ही है — 3 मिलों ने पेराई शुरू तो कर दी है, लेकिन 31 अक्टूबर तक की तालिका में राज्य का चीनी उत्पादन शून्य दर्ज है। यूपी में गन्ना पेरा गया है, पर महीने के आखिर तक उत्पादन की रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी; आखिरी दिनों में शुरू हुई मिलों का उत्पादन नवंबर के आंकड़ों में दिखेगा।

यूपी में बारिश ने क्यों रोकी पेराई

यूपी देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है, इसलिए यहां की देरी का असर पूरे देश के चीनी बाज़ार पर पड़ता है। रूरल वॉयस के अनुसार अक्टूबर की बारिश ने कई मिलों का कार्यक्रम बिगाड़ दिया। पश्चिमी यूपी में खेतों में पानी भरा होने से कटाई ही नहीं हो पाई — गीले खेतों में हार्वेस्टर नहीं उतर सके। गीले गन्ने में नमी ज़्यादा होती है और रिकवरी कम आती है, इसलिए कई मिलों ने पेराई कुछ दिन टाल दी।

अच्छी खबर यह है कि 1 नवंबर से यूपी की कुछ और मिलों ने पेराई शुरू कर दी है और पहले हफ्ते में और मिलों के शुरू होने की उम्मीद है। किसानों को सलाह है कि वे अपनी मिल का इंडेंट और पर्ची कैलेंडर नियमित रूप से देखते रहें। खेत में पानी भरा हो तो पहले उसके निकलने का इंतज़ार करें — गीला गन्ना भेजने से कम रिकवरी का नुकसान होता है।

रिकवरी 8.01 प्रतिशत पर आई: गिरावट क्यों अहम है

रिपोर्ट का दूसरा बड़ा संकेत रिकवरी में गिरावट है। 31 अक्टूबर तक देश की औसत रिकवरी 8.01 प्रतिशत रही, जबकि पिछले साल इसी समय यह 8.44 प्रतिशत थी — यानी 0.43 अंकों की गिरावट। रिकवरी यानी 100 किलो गन्ने से बनी चीनी। जल्दी पेराई में कच्चा गन्ना पेरने से शुरुआती रिकवरी कम रहती है। महाराष्ट्र की रिकवरी तो 7.90 प्रतिशत ही रही, जबकि कर्नाटक की 9.60 प्रतिशत सबसे अच्छी रही। तमिलनाडु में 8.50 प्रतिशत और गुजरात में 4.00 प्रतिशत रिकवरी दर्ज हुई है।

शुरुआती रिकवरी कम होना घबराने की बात नहीं है, क्योंकि सीज़न आगे बढ़ने पर गन्ना पकता है और रिकवरी सुधरती है। पर बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार यह गिरावट कुल उत्पादन के अनुमानों के लिए चिंता का कारण बन सकती है।

एफआरपी 365 रुपये तय, यूपी एसएपी की घोषणा अभी बाकी

केंद्र सरकार ने सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत की मूल रिकवरी पर आधारित है। रिकवरी 10.25 प्रतिशत से ज़्यादा होने पर हर 0.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी पर 3.56 रुपये प्रति क्विंटल का प्रीमियम मिलेगा, और कम होने पर इतनी ही कटौती होगी। लेकिन 9.5 प्रतिशत से नीचे रिकवरी वाली मिलों के किसानों के लिए न्यूनतम एफआरपी 338.30 रुपये प्रति क्विंटल तय है — उससे नीचे कटौती नहीं होगी। यह एफआरपी पूरे देश के लिए केंद्र की दर है।

यूपी के किसानों के लिए इससे अलग राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) लागू होता है, और सत्र 2026-27 के लिए यूपी एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र की दरें इस सत्र की दरें नहीं हैं। सत्र 2025-26 की एसएपी अगेती 400, सामान्य 390 और अनुपयुक्त किस्म के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल थी। किसान संगठन इस बार कम से कम 500 रुपये की मांग कर रहे हैं, और राष्ट्रीय लोक दल ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर एसएपी बढ़ाने की मांग की है। नई एसएपी घोषित होने तक किसी भी दर को इस सत्र की दर मानकर गन्ना न बेचें।

सरकार के कदम और नवंबर का बिक्री कोटा

सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए व्यापारियों पर स्टॉक सीमा लगाई है और 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की समय सीमा 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी है। 36 लाख टन के शुरुआती स्टॉक के साथ अक्टूबर की 8.45 लाख टन नई चीनी नवंबर में आपूर्ति को मज़बूती देगी।

द हिंदू बिज़नेसलाइन के अनुसार खाद्य मंत्रालय ने नवंबर के पहले पखवाड़े के लिए 13 लाख टन चीनी बेचने को कहा है, जिसमें यूपी के लिए 4.17 लाख टन का कोटा है। जैसे-जैसे यूपी की मिलें पेराई में तेज़ी लाएंगी, गन्ना खरीद और भुगतान का चक्र भी गति पकड़ेगा।

यूपी के किसानों के लिए आगे क्या देखें

नवंबर का पहला हफ्ता यूपी के किसानों के लिए सबसे अहम है। देखें कि आपकी मिल का इंडेंट जारी हुआ है या नहीं, और एसएपी की घोषणा पर नज़र रखें — नई दरें आते ही हम उसकी जानकारी सबसे पहले प्रकाशित करेंगे। भुगतान में देरी हो तो टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर शिकायत करें; एसएमएस शॉर्टकोड 51969 भी उपलब्ध है। पर्ची, तौल और भुगतान की रसीद संभालकर रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

31 अक्टूबर तक देश में कितनी मिलों में पेराई शुरू हुई? 152 मिलों में पेराई शुरू हो चुकी थी — महाराष्ट्र 123, गुजरात 10, कर्नाटक और तमिलनाडु 7-7, यूपी 3, तेलंगाना 2।

यूपी में सिर्फ 3 मिलें क्यों चलीं? अक्टूबर की बेमौसम बारिश से पश्चिमी यूपी में कटाई और ढुलाई प्रभावित हुई। खेतों में पानी और गीले गन्ने में कम रिकवरी की आशंका के कारण कई मिलों ने पेराई टाल दी। 1 नवंबर से और मिलों ने पेराई शुरू कर दी है।

रिकवरी 8.01 प्रतिशत का क्या मतलब है? 100 किलो गन्ने से 8.01 किलो चीनी बनी। पिछले साल यह 8.44 प्रतिशत थी। शुरुआती पेराई में कच्चा गन्ना पेरने से रिकवरी कम रहती है और सीज़न आगे बढ़ने पर इसके सुधरने की उम्मीद रहती है।

2026-27 के लिए गन्ने का दाम क्या तय हुआ है? केंद्र का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय है। यूपी एसएपी 2026-27 की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र की एसएपी अगेती 400, सामान्य 390 और अनुपयुक्त 355 रुपये थी — इसे इस सत्र की दर न समझें।

स्रोत: बिज़नेस स्टैंडर्ड (2 नवंबर 2026), रूरल वॉयस (2 नवंबर 2026), द हिंदू बिज़नेसलाइन (2 नवंबर 2026), चीनीमंडी और इंडिया टुडे हिंदी (एसएपी मांग की पृष्ठभूमि के लिए)।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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