चीनी एमएसपी 31 से 42 रुपये करने की मांग, गन्ना भुगतान के 2 रास्ते: 14 दिन में पूरा पैसा या 3 किस्तों में 10% बोनस

चीनी एमएसपी 31 से 42 रुपये करने की मांग, गन्ना भुगतान के 2 रास्ते: 14 दिन में पूरा पैसा या 3 किस्तों में 10% बोनस
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Aamir Raza - 2026-11-08
नई दिल्ली/लखनऊ (विशेष संवाददाता)। गन्ना किसानों के भुगतान को लेकर चल रही बहस में एक नया और अहम मोड़ आ गया है। चीनी व्यापारियों के संगठन ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) ने सरकार से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) 31 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति किलो करने की मांग की है। साथ ही संगठन ने गन्ना भुगतान के लिए गुजरात मॉडल अपनाने का सुझाव दिया है — किसान गन्ना देने के 7 से 14 दिन के भीतर पूरा पैसा ले सकते हैं, या तीन किस्तों में भुगतान स्वीकार करके एफआरपी के ऊपर 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रीमियम पा सकते हैं।
ये मांगें AISTA ने 4 नवंबर को पुणे में रमेश चंद की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय समिति के सामने रखीं। यह समिति 13 अक्टूबर को कर्नाटक और महाराष्ट्र में प्रदर्शन कर रहे गन्ना किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए बनाई गई थी। यूपी के करीब 47 लाख गन्ना किसानों के लिए यह खबर इसलिए अहम है, क्योंकि एमएसपी बढ़ने का सीधा असर मिलों की नकदी पर पड़ता है — और मिलों की नकदी ही किसानों के समय पर भुगतान की गारंटी बनती है। पेराई सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है, लेकिन यूपी में इस सत्र का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है।
एमएसपी 31 रुपये पर 7 साल से अटका, मिलें घाटे में बेचने को मजबूर
AISTA के अध्यक्ष प्रफुल्ल विठलानी ने मीडिया से कहा कि चीनी का एमएसपी फरवरी 2019 से नहीं बदला है। इसे बढ़ाकर कम से कम 4,200 रुपये प्रति क्विंटल यानी 42 रुपये प्रति किलो किया जाना चाहिए, ताकि चीनी मिलें उत्पादन लागत से कम कीमत पर चीनी बेचने के लिए मजबूर न हों।
पिछले सात सालों में गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) लगातार बढ़ता गया, लेकिन चीनी का एमएसपी 31 रुपये प्रति किलो पर ही अटका रहा। महाराष्ट्र के चीनी उद्योग ने समिति को बताया कि 2026-27 सत्र में चीनी का उत्पादन खर्च लाभ सहित 5,038 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच जाता है — जबकि मौजूदा एमएसपी सिर्फ 3,100 रुपये प्रति क्विंटल है। AISTA की दलील है कि अगर एमएसपी लागत के हिसाब से तय हो जाए, तो मिलों के पास नकदी की कमी नहीं रहेगी और किसानों का भुगतान समय पर होगा। महाराष्ट्र के उद्योग ने तो एमएसपी 50 रुपये किलो और एफआरपी दो किस्तों में देने की मांग की है।
गन्ना भुगतान के दो रास्ते — गुजरात मॉडल क्या है
AISTA ने समिति से गुजरात में लागू भुगतान व्यवस्था का अध्ययन करने का आग्रह किया है। इस दो-तरफा मॉडल में किसान अपनी सुविधा के हिसाब से भुगतान का तरीका चुन सकेंगे। पहला विकल्प — गन्ने की सप्लाई के 7 से 14 दिनों के भीतर पूरा एफआरपी ले लें, जो उन किसानों के लिए फायदेमंद होगा जिन्हें फसल बेचने के तुरंत बाद नकदी की जरूरत होती है। दूसरा विकल्प — तीन किस्तों में भुगतान स्वीकार करें, तो एफआरपी के साथ 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रीमियम मिलेगा। यानी थोड़ा इंतजार करने पर किसान को तय दाम से 10 प्रतिशत ज्यादा रकम मिलेगी।
अभी नियम के मुताबिक गन्ने की आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर किसानों को एफआरपी का भुगतान करना अनिवार्य है, लेकिन कई मिलें इस समयसीमा का पालन नहीं करतीं। गुजरात मॉडल का मकसद इसी देरी को खत्म करना है — किसान को साफ विकल्प मिले, और मिल को भुगतान की स्पष्ट समयसीमा।
एफआरपी 365 रुपये पर सहमति, आंदोलन पर सवाल
AISTA ने गन्ने के एफआरपी का समर्थन करते हुए इसे पूरी तरह उचित बताया है। सरकार ने 5 मई को 2026-27 के चीनी सीजन (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। यह कीमत 10.25 प्रतिशत की बुनियादी चीनी रिकवरी दर पर आधारित है — रिकवरी हर 0.1 प्रतिशत बढ़ने पर किसान को 3.56 रुपये प्रति क्विंटल का प्रीमियम मिलता है, और 9.5 प्रतिशत से कम रिकवरी वाली मिलों में भी किसान को न्यूनतम 338.30 रुपये प्रति क्विंटल एफआरपी मिलना तय है। AISTA अध्यक्ष विठलानी के मुताबिक, जब मई में एफआरपी तय हुआ था तो सभी पक्षों ने इस कीमत को स्वीकार कर लिया था, इसलिए अब इस मुद्दे पर आंदोलन का कोई कारण नजर नहीं आता।
इथेनॉल पर खतरे की घंटी — खराब मौसम से उत्पादन घटेगा
AISTA ने समिति के सामने इथेनॉल को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि खराब मौसम के कारण मौजूदा और अगले चीनी सीजन में गन्ने में रस की कमी रहने की आशंका है, जिससे इथेनॉल का उत्पादन घटेगा और मिलों के लिए कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाएगा। पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने के कार्यक्रम के तहत मिलों ने डिस्टिलरी लगाने में भारी निवेश किया था, लेकिन गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी मोलासेस से इथेनॉल बनाने को लेकर नीतियों में बदलाव से मिलों को नुकसान की आशंका है।
AISTA ने मांग की है कि प्रभावित इथेनॉल प्रोजेक्ट के लिए मूलधन और ब्याज के भुगतान पर दो साल की मोहलत दी जाए, और ब्याज सब्सिडी 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी जाए, ताकि ये कर्ज एनपीए न बनें।
यूपी के किसानों पर क्या असर — एसएपी का फैसला अभी बाकी
उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है — ISMA के मुताबिक 5 नवंबर तक देश में 190 मिलों में पेराई शुरू हो गई थी, यूपी में 19 मिलें चली हैं। लेकिन यूपी के किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि 2026-27 सत्र का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है। पिछले सत्र 2025-26 का एसएपी अगेती किस्म के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल तय था। सरकार 10 से 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है, जबकि किसान संगठन 50 से 100 रुपये की बढ़ोतरी मांग रहे हैं। अगर केंद्र सरकार एमएसपी बढ़ाती है, तो मिलों की नकदी सुधरेगी और एसएपी बढ़ाने का रास्ता भी आसान होगा।
किसान अभी क्या करें
पेराई शुरू हो चुकी है, इसलिए किसान अपनी पर्ची और कैलेंडर पर नजर रखें। गन्ना आपूर्ति के बाद 14 दिन के भीतर भुगतान का नियम है — देरी हो तो पहले गन्ना समिति और जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। गन्ना विभाग का टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 है, और एसएमएस के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चीनी का एमएसपी अभी कितना है, और कितना करने की मांग है? चीनी का एमएसपी फरवरी 2019 से 31 रुपये प्रति किलो पर अटका है। AISTA ने इसे 42 रुपये प्रति किलो करने की मांग की है, जबकि महाराष्ट्र के उद्योग ने 50 रुपये प्रति किलो की मांग रखी है।
गुजरात मॉडल में किसान को क्या विकल्प मिलेंगे? दो विकल्प सुझाए गए हैं — गन्ना देने के 7 से 14 दिन के भीतर पूरा एफआरपी ले लें, या तीन किस्तों में भुगतान स्वीकार करके एफआरपी के साथ 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रीमियम पाएं।
2026-27 सत्र का एफआरपी कितना तय हुआ है? केंद्र सरकार ने 5 मई 2026 को 2026-27 सीजन के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था, जो 10.25 प्रतिशत की बुनियादी रिकवरी दर पर आधारित है।
स्रोत: दैनिक जागरण (7 नवंबर 2026), गांव जंक्शन (6 नवंबर 2026), चीनीमंडी (5 नवंबर 2026), बिजनेस स्टैंडर्ड (3 नवंबर 2026), रूरल वॉयस (2 नवंबर 2026)
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