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नवंबर में यूपी की मिलें बेचेंगी 41 लाख क्विंटल चीनी, 15 नवंबर तक कोटे से ज़्यादा बिक्री की छूट — किसानों के भुगतान पर क्या असर?

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 6, 2026 • 6 min read
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नवंबर में यूपी की मिलें बेचेंगी 41 लाख क्विंटल चीनी, 15 नवंबर तक कोटे से ज़्यादा बिक्री की छूट — किसानों के भुगतान पर क्या असर?
अंतिम अपडेट: November 6, 2026 9:05 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए पेराई सत्र की शुरुआत में एक बड़ी खबर आई है। केंद्र सरकार ने नवंबर 2026 के पहले पखवाड़े, यानी 1 से 15 नवंबर तक, देशभर की चीनी मिलों के लिए 13 लाख टन चीनी बेचने का कोटा जारी किया है। इसमें उत्तर प्रदेश की मिलों को 4.17 लाख टन, यानी 41 लाख क्विंटल से ज़्यादा चीनी बेचने की अनुमति मिली है।

इसके साथ ही सरकार ने एक और राहत दी है — मिलें 15 नवंबर तक बनी चीनी को अपने तय कोटे से ऊपर भी बेच सकेंगी। इससे पेराई सत्र की शुरुआत में ही मिलों के पास चीनी बेचकर नकदी जुटाने का रास्ता खुल गया है, और गन्ना भुगतान की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है। कोटे का आदेश 30 अक्टूबर को और छूट का आदेश 31 अक्टूबर को जारी हुआ था।

नवंबर के पहले पखवाड़े का कोटा — किस राज्य को कितना

खाद्य मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, 1 से 15 नवंबर 2026 तक देश की 587 चीनी मिलें कुल 13 लाख टन चीनी खुले बाजार में बेच सकेंगी। महाराष्ट्र की मिलों को सबसे ज़्यादा 4.77 लाख टन, उत्तर प्रदेश को 4.17 लाख टन और कर्नाटक को 2.63 लाख टन चीनी बेचने की अनुमति मिली है। बाकी राज्यों में करीब 1.4 लाख टन कोटा बांटा गया है।

दैनिक जागरण की 2 नवंबर की रिपोर्ट में क्विंटल में आंकड़े दिए गए हैं — देश का कुल कोटा 1 करोड़ 30 लाख क्विंटल है, जिसमें उत्तर प्रदेश का हिस्सा 41 लाख 72 हजार 900 क्विंटल है।

15 नवंबर तक कोटे से ज़्यादा बिक्री की छूट क्या है

रूरल वॉइस की 31 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को 15 नवंबर 2026 तक बनाई गई चीनी को नवंबर के पहले पखवाड़े में बेचने की अनुमति दी है। यह बिक्री मिलों को तय कोटे के अतिरिक्त होगी। इस अतिरिक्त मात्रा के लिए सरकार ने मिलवार सूची जारी की है, जिसमें कुल 13.60 लाख टन चीनी की मात्रा निर्धारित की गई है।

बिक्री के नियम भी साफ कर दिए गए हैं। चीनी की बिक्री का मतलब होगा बिक्री इनवॉयस जारी करना — इनवॉयस में दर्ज मात्रा को ही बेची गई चीनी माना जाएगा। बेची गई चीनी को बिक्री से 7 दिनों के अंदर डिस्पैच करना होगा, और मिलों को 1 से 15 नवंबर के उत्पादन व डिस्पैच का पूरा विवरण 18 नवंबर तक जमा करना होगा। आदेश का पालन न करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई हो सकती है।

कोटा घटा क्यों — त्योहारी सीजन के बाद खपत पूरी

इस बार कोटा घटाया गया है, और इसके पीछे त्योहारी सीजन की खपत है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में कुल 26.50 लाख टन और अक्टूबर में कुल 30 लाख टन चीनी बेचने की अनुमति थी। दीपावली से पहले खपत के हिसाब से बाजार में चीनी पहुंच गई और दाम भी नियंत्रण में आ गए। खपत पूरी होने के बाद सरकार ने नवंबर के पहले पखवाड़े के लिए कोटा फिर से घटाकर 13 लाख टन कर दिया।

कृषक जगत की 3 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में चीनी का एक्स-मिल भाव अभी 5,600 से 5,700 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है।

किसानों के भुगतान पर क्या असर पड़ेगा

यही सवाल हर गन्ना किसान के मन में है — कोटा और बिक्री की छूट से उसके भुगतान पर क्या फर्क पड़ेगा। सीधा असर यह है कि मिलें सीजन की शुरुआत में ही चीनी बेचकर नकदी जुटा सकेंगी। जब मिल के पास पैसा होगा, तो नए गन्ने का भुगतान समय पर करने की उसकी क्षमता बढ़ेगी।

लेकिन एक बात साफ समझनी चाहिए — कोटा मिलना भुगतान की गारंटी नहीं है। भुगतान इस बात पर निर्भर करता है कि मिल की आर्थिक स्थिति कैसी है और उसने पिछले सत्र का बकाया चुकाया है या नहीं। गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने 5 नवंबर को मेरठ की किनौनी मिल के उद्घाटन पर दावा किया था कि प्रदेश में 97 प्रतिशत किसानों का भुगतान हो चुका है। यह मंत्री का दावा है — जिन किसानों का बकाया अभी फंसा है, उन्हें अपनी मिल के भुगतान की स्थिति खुद जांचनी चाहिए।

2026-27 सत्र के गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) अभी घोषित नहीं हुआ है। बिज़नेस स्टैंडर्ड की 3 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार 10 से 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है, जबकि किसान संगठन 50 से 100 रुपये की बढ़ोतरी मांग रहे हैं। 2025-26 सत्र में अगैती किस्म का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल था।

यूपी की मिलों की स्थिति — 10 नवंबर तक ज़्यादातर शुरू

प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं। गन्ना विकास विभाग के मुताबिक, अभी 9 मिलों में पेराई शुरू हुई है — इनमें सहकारी क्षेत्र की 1 और निजी क्षेत्र की 8 मिलें हैं। 33 मिलों ने इंडेंट जारी कर दिया है। प्रदेश की ज्यादातर मिलें 10 नवंबर तक पेराई शुरू कर देंगी — बिजनौर की बरकातपुर मिल ने 1 नवंबर को सबसे पहले पेराई शुरू की थी।

बारिश ने इस बार पेराई की शुरुआत में अड़चन डाली थी। अक्टूबर के आखिरी दिनों में हुई भारी बारिश से खेतों में जलभराव हो गया और गन्ने की कटाई-छिलाई रुक गई। मवाना और दौराला मिलों की तारीखें आगे बढ़ीं, धामपुर मिल 11 नवंबर से शुरू होगी।

किसानों के लिए ध्यान रखने वाली बातें

गन्ना छिलाई तभी करें जब आपके केंद्र की पर्ची मिल गई हो। तौल के समय कांटे पर खुद मौजूद रहें और पर्ची पर दर्ज वजन और किस्म की जांच कर लें। भुगतान की स्थिति ई-गन्ना ऐप या caneup.in पोर्टल पर समय-समय पर जांचते रहें — अगर भुगतान 14 दिन से ज़्यादा रुका हो तो शिकायत दर्ज कराएं। गन्ना विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर संपर्क किया जा सकता है, और एसएमएस के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नवंबर के पहले पखवाड़े में यूपी की मिलें कितनी चीनी बेच सकती हैं? उत्तर प्रदेश की मिलों को 1 से 15 नवंबर 2026 तक 4.17 लाख टन, यानी 41 लाख 72 हजार 900 क्विंटल चीनी बेचने का कोटा मिला है। 15 नवंबर तक बनी चीनी कोटे से ऊपर भी बेची जा सकेगी।

कोटे से ज़्यादा चीनी बेचने की छूट कब तक है? 15 नवंबर 2026 तक बनी हुई चीनी को तय कोटे के अतिरिक्त बेचने की अनुमति है। इस अतिरिक्त मात्रा के लिए सरकार ने मिलवार सूची जारी की है, जिसमें कुल 13.60 लाख टन चीनी निर्धारित की गई है।

कोटा घटने से चीनी के दाम बढ़ेंगे क्या? कोटा इसलिए घटाया गया है क्योंकि त्योहारी सीजन की खपत पूरी हो चुकी है और बाजार में चीनी पर्याप्त है। यूपी में चीनी का एक्स-मिल भाव अभी 5,600 से 5,700 रुपये प्रति क्विंटल है।

गन्ना भुगतान में देरी हो तो किसान कहां शिकायत करें? जिला गन्ना अधिकारी, गन्ना विकास समिति या गन्ना विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर शिकायत की जा सकती है। भुगतान की स्थिति ई-गन्ना ऐप और caneup.in पर भी देखी जा सकती है।

स्रोत: दैनिक जागरण (2 नवंबर 2026), रूरल वॉइस (31 अक्टूबर 2026), कृषक जगत (3 नवंबर 2026), बिज़नेस स्टैंडर्ड (3 नवंबर 2026), किसान इंडिया (5 नवंबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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