गन्ने का भाव ₹550 प्रति क्विंटल और 60 साल से ऊपर के किसानों को ₹5,000 मासिक पेंशन — भाकियू की नई मांग

अमरोहा की मंडी धनौरा में गुरुवार को हुई भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की मासिक बैठक से दो बड़ी मांगें सामने आई हैं — गन्ने का भाव ₹550 प्रति क्विंटल किया जाए और 60 साल की उम्र पूरी कर चुके किसानों को ₹5,000 की मासिक पेंशन दी जाए। यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि भाव उस हिसाब से नहीं बढ़ रहा। पेराई सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है, लेकिन इस सत्र का राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) अभी घोषित नहीं हुआ है।
धनौरा बैठक में क्या-क्या मांग उठी
बैठक में सबसे बड़ी मांग गन्ने के समर्थन भाव को ₹550 प्रति क्विंटल करने की रही। यूनियन का कहना है कि खाद, बीज, डीजल, मजदूरी और सिंचाई का खर्च इतना बढ़ गया है कि मौजूदा भाव पर गन्ने की खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत पहले ही कह चुके हैं कि उत्पादन लागत ₹400 प्रति क्विंटल से ऊपर निकल चुकी है, इसलिए भाव में कम से कम ₹50 से ₹100 की बढ़ोतरी होनी चाहिए। धनौरा में यूनियन ने सीधे ₹550 का आंकड़ा सरकार के सामने रख दिया।
बैठक की दूसरी बड़ी मांग बुजुर्ग किसानों के लिए पेंशन की रही। यूनियन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि 60 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके किसानों के लिए ₹5,000 की मासिक पेंशन शुरू की जाए — खेत में पूरी जिंदगी मेहनत करने के बाद बुढ़ापे में किसान के पास आय का कोई ठोस सहारा नहीं बचता।
₹550 का हिसाब: मौजूदा भाव क्या है और सरकार क्या सोच रही है
मौजूदा भाव का हिसाब जान लीजिए। पेराई सत्र 2025-26 के लिए सरकार ने अगेती का एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल और सामान्य का ₹390 प्रति क्विंटल तय किया था, जबकि अनुपयुक्त प्रजाति का भाव ₹355 था। यह दर पिछले सत्र की है — पेराई सत्र 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है।
केंद्र ने 2026-27 के लिए गन्ने का न्यूनतम मूल्य (एफआरपी) ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन मिलें वास्तव में राज्य के एसएपी पर गन्ना खरीदती हैं — इसीलिए किसान हर साल एसएपी के ऐलान का इंतजार करते हैं।
बिजनेस स्टैंडर्ड की 3 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव से पहले सरकार एसएपी में ₹10 से ₹20 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है — पिछले सत्र की ₹30 की बढ़ोतरी से कम। किसान संगठनों ने ₹50 से ₹100 की बढ़ोतरी मांगी है, जबकि निजी मिलें भाव जस का तस रखने के पक्ष में हैं।
5009 प्रजाति का मुद्दा: धनौरा की वेब शुगर मिल से जुड़ी मांग
बैठक में एक मुद्दा सीधे किसानों की जेब से जुड़ा था। आलोक कुमार ने मांग की कि धनौरा की वेब शुगर मिल समेत प्रदेश की सभी मिलें गन्ना प्रजाति 5009 को अगेती किस्म मानकर खरीदें। अगेती का भाव सामान्य से ज्यादा होता है, इसलिए अगर 5009 को अगेती नहीं माना जाता तो किसान को प्रति क्विंटल कम दाम मिलता है, भले ही फसल जल्दी तैयार हो गई हो।
धान खरीद केंद्रों की अव्यवस्था और मिलावटखोरी पर आवाज
बैठक में धान की खरीद को लेकर भी नाराजगी जाहिर की गई। किसानों ने कहा कि अमरोहा और प्रदेश के दूसरे हिस्सों में बने धान खरीद केंद्रों पर धान बेचने में काफी परेशानी हो रही है, और केंद्रों की अव्यवस्था तुरंत दूर की जानी चाहिए। त्योहारों में बाजार में होने वाली मिलावटखोरी पर रोक की मांग भी उठी — किसानों का कहना है कि इससे आम लोगों की सेहत और ईमानदार किसानों, दोनों को नुकसान होता है।
पेराई सत्र की ताजा स्थिति: 122 में से 19 मिलें ही चालू
भाव की मांग ऐसे समय में उठी है जब पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत धीमी रही है। गन्ना विकास विभाग के मुताबिक, अब तक 9 चीनी मिलों में पेराई शुरू हुई है — 1 सहकारी और 8 निजी — और 33 मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की 6 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश की कुल 122 मिलों में से अब तक सिर्फ 19 में पेराई शुरू हो पाई है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश के कारण गन्ने में नमी ज्यादा है, जिससे रिकवरी घटी है। बिजनौर में रिकवरी पिछले साल के मुकाबले करीब 1.5 प्रतिशत अंक कम है, और बरकतपुर मिल में रिकवरी 8.5 प्रतिशत रह गई है, जबकि आमतौर पर 10 प्रतिशत की उम्मीद की जाती है। सहारनपुर में इस साल करीब 1,400 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि पिछले साल करीब 900 मिलीमीटर हुई थी। बारिश का असर चीनी के दामों पर भी दिख रहा है — नवंबर के पहले पखवाड़े में चीनी के दाम ₹500 से ₹600 प्रति क्विंटल तक बढ़ गए हैं और बरकतपुर मिल की नई चीनी ₹5,400 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है।
किसान के लिए इसका मतलब क्या है
धनौरा की बैठक से दो साफ संदेश मिले हैं। पहला, भाकियू टिकैत ने ₹550 का आंकड़ा रखकर दबाव बढ़ा दिया है — अब सरकार को एसएपी के ऐलान में इस मांग का जवाब देना होगा। दूसरा, पेंशन की मांग ने आंदोलन में बुजुर्ग किसानों की सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा भी जोड़ दिया है।
जिन किसानों ने 5009 प्रजाति बोई है, उनके लिए बैठक की मांग सीधी राहत लेकर आ सकती है — अगर मिलें इस प्रजाति को अगेती मान लें तो उन्हें प्रति क्विंटल ज्यादा दाम मिलेगा। ₹550 की मांग पूरी होना मुश्किल दिखता है, लेकिन यह मांग बातचीत के लिए एक मजबूत आधार बन गई है। किसानों को सलाह है कि वे अपनी पर्ची, तौल और भुगतान का रिकॉर्ड संभालकर रखें और एसएपी के ऐलान पर नजर बनाए रखें — इसी ऐलान से तय होगा कि इस सत्र में उनके गन्ने का भाव क्या मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भाकियू टिकैत ने गन्ने का भाव कितना करने की मांग की है? भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने सरकार से पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का भाव ₹550 प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग की है। यह मांग 5 नवंबर को मंडी धनौरा (अमरोहा) में हुई मासिक बैठक में उठाई गई।
बुजुर्ग किसानों के लिए पेंशन की क्या मांग है? बैठक में केंद्र सरकार से मांग की गई है कि 60 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके किसानों के लिए ₹5,000 की मासिक पेंशन शुरू की जाए, ताकि बुढ़ापे में किसानों को आय का सहारा मिल सके।
2026-27 सत्र का एसएपी घोषित हुआ है या नहीं? नहीं, 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक ₹10 से ₹20 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर विचार चल रहा है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती का एसएपी ₹400 और सामान्य का ₹390 प्रति क्विंटल था।
गन्ना प्रजाति 5009 को लेकर क्या मांग उठी है? भाकियू ने मांग की है कि धनौरा की वेब शुगर मिल समेत प्रदेश की सभी मिलें गन्ना प्रजाति 5009 को अगेती किस्म मानकर खरीदें, ताकि किसानों को अगेती का ज्यादा भाव मिल सके।
इस समय प्रदेश में कितनी चीनी मिलों में पेराई चल रही है? 6 नवंबर तक प्रदेश की 122 चीनी मिलों में से 19 में पेराई शुरू हो चुकी है। सत्र की शुरुआत में 9 मिलों ने काम शुरू किया था और 33 मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी किया था।
स्रोत: गांव जंक्शन, चीनीमंडी, बिजनेस स्टैंडर्ड, द वीक (पीटीआई), रूरल वॉइस, एग्रीइनसाइट (टाइम्स ऑफ इंडिया)
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