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बिजनौर: बिलाई मिल ने किसानों को 8 करोड़ चुकाए, डीएम का अल्टीमेटम — पेराई शुरू होने के 15 दिन में पूरा बकाया, नहीं तो कानूनी कार्रवाई

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 7, 2026 • 6 min read
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बिजनौर: बिलाई मिल ने किसानों को 8 करोड़ चुकाए, डीएम का अल्टीमेटम — पेराई शुरू होने के 15 दिन में पूरा बकाया, नहीं तो कानूनी कार्रवाई
अंतिम अपडेट: November 7, 2026 9:32 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

बिजनौर जिले के गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। बिलाई चीनी मिल ने शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 तक किसानों के बकाया गन्ना मूल्य में से 8 करोड़ रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेज दिए हैं। जिला गन्ना अधिकारी, बिजनौर ने इसकी पुष्टि की है।

जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने मिल प्रबंधन को सख्त अल्टीमेटम दिया है कि पेराई सत्र शुरू होने के 15 दिन के भीतर किसानों का शत-प्रतिशत बकाया हर हाल में चुका दिया जाए। बिलाई मिल से जुड़े लगभग 31 हजार किसान महीनों से बकाये का इंतजार कर रहे थे। जिले की 10 मिलों में से 9 ने पिछले सत्र का पूरा भुगतान कर दिया था, सिर्फ बिलाई पर बकाया लंबित था।

डीएम का सख्त आदेश: 15 दिन में पूरा बकाया, नहीं तो कानूनी कार्रवाई

जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने बिलाई चीनी मिल के प्रबंधन को अत्यंत सख्त निर्देश जारी किए हैं। डीएम ने आदेश दिया है कि किसानों का जितना भी अवशेष गन्ना मूल्य बाकी है, उसका शत-प्रतिशत भुगतान मिल का पेराई सत्र चलने के 15 दिन के भीतर हर हाल में सुनिश्चित कर दिया जाए।

डीएम ने स्पष्ट किया है कि भुगतान में मिल की किसी भी तरह की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समयसीमा में भुगतान न हुआ तो मिल के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। गन्ना नियंत्रण आदेश 1966 के खंड 3 (3) के अनुसार गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर भुगतान अनिवार्य है।

8 करोड़ का भुगतान: कितना बकाया बचा

बिलाई मिल के बकाये को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में कुल राशि 22 से 26 करोड़ रुपये के बीच बताई गई है। आजाद समाज पार्टी के किसान मोर्चा की ओर से पुलिस अधीक्षक को दी गई तहरीर में बकाया लगभग 22 करोड़ रुपये बताया गया था, जबकि किसान संगठनों ने नवंबर की शुरुआत में यह राशि करीब 26 करोड़ रुपये बताई थी।

भुगतान की राह 2 नवंबर की बैठक से खुली थी। जिला गन्ना अधिकारी बृजेश कुमार पटेल के कार्यालय में भाकियू (अराजनैतिक) के पदाधिकारियों और मिल के यूनिट हेड भूपेंद्र सिंह तथा महाप्रबंधक गन्ना सुभाष तोमर के बीच वार्ता हुई। मिल ने लिखित आश्वासन दिया कि दीपावली से पहले डायवर्जन के 10 करोड़ और बची चीनी के मूल्य के लगभग 4 करोड़ रुपये दिए जाएंगे, और मिल चलने के 10 दिन के अंदर शेष लगभग 12 करोड़ रुपये चुका दिए जाएंगे।

नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के हस्तक्षेप के बाद भी मिल ने दीपावली से पहले 8 करोड़ रुपये देने और 20 नवंबर तक दो चरणों में पूरा भुगतान करने का भरोसा दिया था। 6 नवंबर तक 8 करोड़ रुपये खातों में पहुंचने से यह भरोसा हकीकत में बदलता दिख रहा है।

‘भुगतान नहीं तो गन्ना नहीं’: आंदोलन से भुगतान तक का सफर

बिलाई मिल का बकाया मामला अचानक नहीं सुलझा है, इसके पीछे किसानों का लंबा आंदोलन है। भाकियू (अराजनैतिक) से जुड़े किसानों ने ऐलान किया था कि पिछले सत्र का भुगतान न मिला तो वे नए पेराई सत्र में मिल को गन्ना नहीं देंगे। संगठन के प्रदेश युवा अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा था कि भुगतान न होने पर किसान अपनी फसल सीधे जिला कलेक्ट्रेट में डंप कर देंगे।

आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत 20 हजार से अधिक किसानों के शपथ पत्र बने। 21 अक्तूबर की महापंचायत के बाद 2 नवंबर को एडीएम अंशिका दीक्षित की अध्यक्षता में हुई बैठक में 5 बड़े फैसले लिए गए, जिनमें बिलाई मिल का पूरा बकाया 25 नवंबर तक और बजाज ग्रुप की मिलों का भुगतान 5 दिसंबर तक चुकाना शामिल था।

पूरे प्रदेश में सख्ती: 3 मिलों पर वसूली प्रमाण-पत्र जारी

बिलाई मिल का मामला अकेला नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में गन्ना विकास विभाग ने लापरवाह मिलों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रमुख सचिव वीना कुमारी के निर्देश पर गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिल के खिलाफ वसूली प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं और राजस्व वसूली की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

पेराई सत्र 2024-25 में प्रदेश की 122 संचालित चीनी मिलों में से 51 ने 100 प्रतिशत भुगतान कर दिया है, जबकि 34 ने 84 प्रतिशत से अधिक भुगतान किया है। गन्ना विभाग भुगतान की प्रतिदिन समीक्षा कर रहा है और अन्य मिलों को भी चेतावनी दी गई है कि अगर शीघ्र भुगतान नहीं किया गया तो उनके खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

किसानों को क्या करना चाहिए: भुगतान जांचने के 4 तरीके

अपना भुगतान ई-गन्ना ऐप पर जरूर जांचें। ऐप में गन्ना सट्टा और पर्ची कैलेंडर के साथ भुगतान की स्थिति भी दिखती है। गन्ना विकास विभाग की वेबसाइट caneup.in पर भी अपने क्षेत्र की मिल का मिलवार भुगतान विवरण देखा जा सकता है।

भुगतान न आया हो तो अपनी गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं, पर्ची और बैंक खाते का विवरण साथ रखें। आईजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत की जा सकती है। टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 या 1800-180-5129 और एसएमएस शॉर्टकोड 51969 पर भी जानकारी मिल सकती है।

गन्ने का भाव: 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी

पेराई शुरू होने के साथ ही किसानों की नजरें गन्ने के भाव पर भी टिकी हैं। साफ कर दें कि 2026-27 सत्र के लिए राज्य परामर्श मूल्य की घोषणा अभी बाकी है। 2025-26 सत्र के लिए अगेती किस्म का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था।

किसान संगठन एसएपी में 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी मांग रहे हैं। भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत ने गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है, उनका कहना है कि उत्पादन लागत 400 रुपये से ऊपर पहुंच चुकी है। सरकार 10 से 20 रुपये की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है, अंतिम फैसला राज्य कैबिनेट को लेना है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बिलाई चीनी मिल ने किसानों को कितना भुगतान किया है? 6 नवंबर 2026 तक 8 करोड़ रुपये किसानों के खातों में भेजे गए हैं। जिला गन्ना अधिकारी, बिजनौर ने इसकी पुष्टि की है।

बिलाई मिल का पूरा बकाया कब तक चुकाया जाएगा? पेराई शुरू होने के 15 दिन के भीतर। बैठक में 25 नवंबर तक पूरा बकाया चुकाने का फैसला भी हुआ था।

बिलाई मिल से कितने किसान जुड़े हैं? लगभग 31 हजार किसान। इनमें से 20 हजार से अधिक ने मिल को गन्ना न देने के शपथ पत्र भरे थे।

गन्ना खरीद के कितने दिन में भुगतान का नियम है? गन्ना नियंत्रण आदेश 1966 के खंड 3 (3) के अनुसार, गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य है।

अपना गन्ना भुगतान कैसे जांचें? ई-गन्ना ऐप या caneup.in पर भुगतान की स्थिति देखी जा सकती है। हेल्पलाइन 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर भी जानकारी मिल सकती है।

2026-27 के लिए गन्ने का एसएपी कितना तय हुआ है? घोषणा अभी बाकी है। 2025-26 में अगेती किस्म का एसएपी 400 रुपये और सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल था।

स्रोत: खबरेंलाल (6 नवंबर 2026), न्यूज इंडिया टुडे (4 नवंबर 2026), भास्कर डिजिटल (2 नवंबर 2026), द मूकनायक (3 नवंबर 2026), टारगेट टीवी लाइव (2 नवंबर 2026), किसान इंडिया (4 नवंबर 2026), ट्रैक्टर जंक्शन (6 नवंबर 2026), बिजनेस स्टैंडर्ड (3 नवंबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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