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बरेली के 10,000 किसानों के खाते में ₹11.33 करोड़: केसर मिल का 162 करोड़ बकाया, 15 दिन में पूरा भुगतान का वादा

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 7, 2026 • 6 min read
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बरेली के 10,000 किसानों के खाते में ₹11.33 करोड़: केसर मिल का 162 करोड़ बकाया, 15 दिन में पूरा भुगतान का वादा
अंतिम अपडेट: November 7, 2026 11:16 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

बरेली के बहेड़ी इलाके के करीब 10 हजार गन्ना किसानों के लिए दीपावली से ठीक पहले बड़ी राहत की खबर आई है। बहेड़ी स्थित केसर चीनी मिल ने शुक्रवार, 6 नवंबर को किसानों के बकाया गन्ना मूल्य में से 11 करोड़ 33 लाख रुपये जारी कर दिए। रकम मिलते ही गन्ना समिति ने बैंकों को एडवाइज भेज दी और देर शाम तक किसानों के खातों में पैसा पहुंचाने का काम चलता रहा।

केसर मिल पर किसानों का करीब 162 करोड़ रुपये दो साल से बकाया था। 30 अक्टूबर को धरने और चक्का जाम की चेतावनी के बाद जिला प्रशासन की सख्ती और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप से मिल प्रबंधन झुका। अब सवाल यह है कि 15 दिन में पूरा बकाया चुकाने का वादा निभाया जाता है या नहीं।

केसर मिल पर कितना बकाया, कितना मिला

केसर चीनी मिल पर गन्ना किसानों का करीब 162 करोड़ रुपये बकाया है। मिल प्रबंधन ने आर्थिक संकट का हवाला देते हुए बकाया चुकाने में असमर्थता जताई थी। मिल की बिक्री के जरिये भुगतान करने की बात कही गई, लेकिन दो सौदे टूटने से मामला और उलझ गया।

शुक्रवार शाम करीब चार बजे मिल प्रबंधन ने 11 करोड़ 33 लाख रुपये जारी कर दिए। रकम मिलते ही गन्ना समिति ने बैंकों को एडवाइज भेज दी और शुक्रवार को ही किसानों के खातों में भुगतान के निर्देश दिए गए। देर शाम तक करीब 10 हजार किसानों के खातों में रकम पहुंचाने की प्रक्रिया जारी रही।

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) से वार्ता में मिल प्रबंधक ने शुक्रवार रात तक 11.5 करोड़ रुपये भेजने की बात कही थी। जारी 11.33 करोड़ रुपये उसी भरोसे की पहली किस्त है। इसके बाद भी मिल पर करीब 150 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया रह जाता है।

30 अक्टूबर का धरना: ‘भुगतान नहीं तो चक्का जाम’

केसर मिल के किसानों का धैर्य 30 अक्टूबर को टूट गया था। लंबे समय से भुगतान का इंतजार कर रहे किसानों ने उस दिन धरना दिया और चेतावनी दी कि अगर दीपावली तक भुगतान नहीं हुआ तो चक्का जाम किया जाएगा।

किसान दो साल से भुगतान के लिए भटक रहे थे और मिल प्रबंधन हर बार आर्थिक संकट का हवाला देकर टाल देता था। मिल की बिक्री से भुगतान की योजना भी भरोसा नहीं दिला पाई थी, क्योंकि दो सौदे पहले ही टूट चुके थे।

2 नवंबर: पुलिस के साथ टीम पहुंची, सील की चेतावनी

किसानों के आंदोलन की चेतावनी के बाद प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी। जिलाधिकारी ने कार्रवाई के लिए अधिकारियों की टीम गठित की। 2 नवंबर को टीम पुलिस बल के साथ मिल के प्रशासनिक ब्लॉक पहुंची और प्रबंधन को मिल सील करने की चेतावनी दी।

मिल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने दीपावली से पहले कुछ भुगतान करने की बात कही, लेकिन उप जिलाधिकारी ने केवल आश्वासन पर भरोसा करने से इनकार कर दिया। इसके बाद मिल के सीएमडी हर्ष आर. किलाचंद से वीडियो कॉल पर बात हुई। उन्होंने दो पार्टियों से बिक्री की बातचीत चलने की जानकारी दी और अधिकारियों ने मिल प्रबंधन को 10 नवंबर तक का समय दिया।

15 दिन में पूरा बकाया और मिल दोबारा चालू करने का भरोसा

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी जगत सिंह ने शुक्रवार को मिल अधिकारियों के साथ वार्ता की। वार्ता में मिल प्रबंधन ने अगले 15 दिनों के भीतर पूरा बकाया चुकाने और बंद पड़ी चीनी मिल को दोबारा चालू करने का भरोसा दिलाया।

वार्ता के बाद बहेड़ी की पंजाबी कॉलोनी स्थित संगठन कार्यालय पर किसान नेताओं ने प्रेसवार्ता की। नेताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए कहा कि उनके निर्देश के बाद प्रशासन ने मिल प्रबंधन पर दबाव बनाया। किसानों ने शेष बकाया की स्पष्ट समय सीमा जल्द घोषित करने की मांग की है।

मिल कर्मचारियों को भी राहत: एक महीने का वेतन

केसर मिल प्रबंधन ने किसानों के साथ अपने कर्मचारियों और मजदूरों को भी दीपावली से पहले राहत दी है। प्रबंधन ने कर्मचारियों को एक महीने का वेतन जारी कर दिया है, जबकि तीन महीने का वेतन बकाया था।

बरेली की यह खबर बिजनौर की बिलाई मिल के 8 करोड़ रुपये भुगतान के एक दिन बाद आई है, जहां भी प्रशासन की सख्ती से भुगतान हुआ था।

किसानों को क्या करना चाहिए: भुगतान जांचने के 4 तरीके

पहला, अपना बैंक खाता और एसएमएस जांचें। गन्ना समिति ने बैंकों को शुक्रवार को ही भुगतान करने के निर्देश दिए थे। अगर एसएमएस नहीं आया है तो पासबुक अपडेट करवाकर या मिनी स्टेटमेंट से जांच करें।

दूसरा, ई-गन्ना ऐप पर भुगतान विवरण देखें। ऐप में पर्ची, तौल और भुगतान की स्थिति दिखती है। ऐप में भुगतान दिखे लेकिन खाते में पैसा न आए तो बैंक से संपर्क करें।

तीसरा, गन्ना समिति कार्यालय से संपर्क करें। समिति ने ही बैंकों को एडवाइज जारी की है, इसलिए उसी के पास किस्तवार सूची होती है। अपना खाता नंबर और पर्ची की जानकारी साथ लेकर जाएं।

चौथा, टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर शिकायत दर्ज कराएं। एसएमएस जानकारी के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 है। शिकायत में नाम, गांव, मिल का नाम और बकाया रकम जरूर बताएं।

गन्ने का भाव: 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी

भुगतान की खबर के साथ ही किसानों के मन में गन्ने के भाव का सवाल भी है। पेराई सत्र 2026-27 के लिए राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी बाकी है। पेराई शुरू हो चुका है, लेकिन सरकार ने इस सत्र का भाव अभी तय नहीं किया है।

2025-26 के लिए एसएपी अगेती किस्म के लिए 400 रुपये और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ था, जिसमें 30 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। यह दर 2025-26 सत्र की है, इसे 2026-27 की दर समझने की गलती न करें।

बिज़नेस स्टैंडर्ड (3 नवंबर) के अनुसार सरकार एसएपी में 10 से 20 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। किसान संगठन 50 से 100 रुपये मांग रहे हैं, जबकि निजी मिलें भाव यथावत रखना चाहती हैं। अंतिम फैसला राज्य मंत्रिमंडल का होगा। आधिकारिक घोषणा से पहले बढ़े भाव की खबर को अफवाह ही मानें।

आपके सवाल

प्रश्न: केसर मिल ने किसानों को कितना भुगतान किया है? उत्तर: 6 नवंबर को 11 करोड़ 33 लाख रुपये जारी हुए हैं। इससे बहेड़ी इलाके के करीब 10 हजार किसानों को दीपावली से पहले राहत मिली है।

प्रश्न: केसर मिल पर कुल कितना बकाया है? उत्तर: करीब 162 करोड़ रुपये, जो दो साल से अटका था। पहली किस्त के बाद भी 150 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया रह जाता है।

प्रश्न: पूरा बकाया कब तक मिलेगा? उत्तर: मिल प्रबंधन ने 15 दिनों में पूरा बकाया चुकाने का भरोसा दिलाया है।

प्रश्न: भुगतान खाते में आया है या नहीं, कैसे जांचूं? उत्तर: बैंक खाता और एसएमएस जांचें, ई-गन्ना ऐप पर स्थिति देखें। शिकायत के लिए हेल्पलाइन 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर संपर्क करें।

प्रश्न: 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का भाव कितना है? उत्तर: एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। 2025-26 में अगेती किस्म का भाव 400 रुपये और सामान्य किस्म का भाव 390 रुपये प्रति क्विंटल था।

स्रोत: अमृत विचार (7 नवंबर 2026), न्यूज़ वॉक्स इंडिया (6 नवंबर 2026), बिज़नेस स्टैंडर्ड (3 नवंबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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