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उद्घाटन के 5 दिन बाद भी नहीं घूमा बागपत-रमाला मिलों का चक्का: 2 लाख क्विंटल इंडेंट जारी, किसान खेत में गन्ना लिए परेशान

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 7, 2026 • 6 min read
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उद्घाटन के 5 दिन बाद भी नहीं घूमा बागपत-रमाला मिलों का चक्का: 2 लाख क्विंटल इंडेंट जारी, किसान खेत में गन्ना लिए परेशान
अंतिम अपडेट: November 7, 2026 4:31 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

बागपत जिले के हजारों गन्ना किसान इस वक्त अजीब स्थिति में फंसे हैं। जिले की दो सहकारी चीनी मिलों — रमाला और बागपत — का नए पेराई सत्र 2026-27 के लिए धूमधाम से उद्घाटन हो चुका है, लेकिन मिलों का चक्का अब तक नहीं घूमा है। रमाला मिल के उद्घाटन को पांच दिन और बागपत मिल के उद्घाटन को तीन दिन बीत चुके हैं, फिर भी एक भी क्विंटल गन्ने की पेराई शुरू नहीं हुई। खेत में खड़ा गन्ना काटकर तैयार बैठे किसान अब यही पूछ रहे हैं कि जब मिल चलनी ही नहीं थी, तो उद्घाटन की इतनी जल्दी क्यों थी।

यह हाल तब है जब प्रदेश सरकार का जोर इस बात पर है कि पेराई सत्र समय से शुरू हो। प्रदेश में 9 चीनी मिलों में व्यावसायिक पेराई शुरू हो चुकी है और 33 मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिए हैं। ऐसे में बागपत की दोनों सहकारी मिलों का रुका रहना किसानों की चिंता बढ़ा रहा है, क्योंकि हर दिन की देरी से खेत खाली होने और रबी की बुवाई पर असर पड़ता है।

रमाला मिल: 2 नवंबर को उद्घाटन, पांच दिन बाद भी पेराई नहीं

सहकारी चीनी मिल रमाला में नए पेराई सत्र का शुभारंभ 2 नवंबर को हुआ था। इस मौके पर राज्यमंत्री केपी मलिक के साथ अधिकारी और किसान मौजूद रहे। धूमधाम से उद्घाटन हुआ, लेकिन पांच दिन बाद भी मिल में गन्ना पेराई शुरू नहीं हो पाई।

रमाला चीनी मिल के जीएम गोविंद मौर्य ने बताया कि बरसात के कारण गन्ना नहीं आ रहा था, इसलिए चीनी मिल नहीं चल पाई। उनके मुताबिक मिल की ओर से दो लाख क्विंटल गन्ने का इंडेंट जारी किया हुआ है और शनिवार को चीनी मिल में गन्ना पेराई शुरू कर दी जाएगी। रमाला मिल की रोजाना पेराई क्षमता 50 हजार क्विंटल है।

बागपत मिल: शुभ मुहूर्त में उद्घाटन, पेराई दिवाली के बाद

सहकारी चीनी मिल बागपत का शुभारंभ 4 नवंबर को हुआ था। इसमें प्रदेश के गन्ना मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी, अधिकारियों, नेताओं और किसानों ने भाग लिया। लेकिन दो दिन बाद भी इस मिल में गन्ना पेराई शुरू नहीं हो पाई।

बागपत चीनी मिल के जीएम प्रदीप कुमार ने बताया कि चार नंबर शुभ समय होने के कारण पेराई सत्र का शुभारंभ कराया गया था। उनके मुताबिक बरसात के कारण खेतों में पानी भरा होने तथा दिवाली पर श्रमिकों के नहीं आने से गन्ना पेराई शुरू नहीं हो पाई। मिल प्रबंधन का कहना है कि तैयारी पूरी है, लेकिन अब दिवाली के अगले दिन चीनी मिल चलेगी। बागपत मिल की रोजाना पेराई क्षमता 25 हजार क्विंटल है।

दोनों मिलों का कहना एक जैसा है — बरसात और गन्ना न पहुंचना। लेकिन किसानों का सवाल यह है कि जब बरसात और दिवाली की तारीख पहले से तय थी, तो उद्घाटन की तारीखें इस तरह क्यों तय की गईं कि मिल चल ही न पाए।

मंत्री ने किया था 5,000 टीसीडी नई फैक्टरी का ऐलान

बागपत मिल के उद्घाटन के मौके पर गन्ना मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने जिले को बड़ी औद्योगिक सौगात का ऐलान भी किया था। मंत्री ने बताया था कि पुरानी चीनी मिल को अपग्रेड किया जाएगा और 5 हजार टीसीडी क्षमता की नई फैक्टरी को मंजूरी मिल चुकी है। इसमें बिजली उत्पादन के साथ एथनॉल प्लांट भी लगाया जाएगा।

मंत्री ने इस दौरान गन्ना मूल्य और किसानों के भुगतान पर भी बात की। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में गन्ने के दाम में 85 रुपये की बढ़ोतरी हुई है और आगामी कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री के सामने किसानों की गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग रखेंगे।

प्रदेश में 9 मिलों में पेराई शुरू, 33 ने इंडेंट जारी किए

गन्ना विकास विभाग के अनुसार पेराई सत्र 2026-27 के तहत प्रदेश की 9 चीनी मिलों में व्यावसायिक पेराई शुरू हो चुकी है। सहारनपुर परिक्षेत्र की तीन, मेरठ की एक, मुरादाबाद की दो और लखनऊ परिक्षेत्र की तीन मिलों ने पेराई शुरू कर दी है।

कुल 33 चीनी मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी किया है। इनमें 24 मिलों का पेराई कार्य दिवाली से पहले शुरू होना प्रस्तावित था। प्रदेश में 47 लाख से अधिक किसान चीनी मिलों को अपना गन्ना बेचते हैं। बागपत जिले की तीनों चीनी मिलों — बागपत, रमाला और मलकपुर — से हजारों किसान जुड़े हैं।

गन्ना भाव पर अब भी फैसला बाकी — 2026-27 एसएपी

पेराई शुरू होने के साथ किसानों की नजरें गन्ने के भाव पर भी टिकी हैं। पेराई सत्र 2025-26 के लिए अगेती प्रजाति का एसएपी 400 रुपये, सामान्य प्रजाति का 390 रुपये और अनुपयुक्त प्रजाति का 355 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था। पेराई सत्र 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।

सरकार 2026-27 सत्र के लिए एसएपी में 10 से 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। वहीं किसान संगठनों ने 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की मांग की है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग रखी है, जबकि मिल मालिक भाव में कोई बदलाव नहीं चाहते।

किसानों के लिए यह दोहरी मार है — एक तरफ मिलें चल नहीं रही हैं, दूसरी तरफ नए सत्र का भाव भी तय नहीं है। जब तक एसएपी घोषित नहीं होता, किसान यह नहीं जान पाते कि इस बार उनके गन्ने की सही कीमत क्या मिलेगी।

किसान इस बीच क्या करें

पहला काम यह है कि किसान अपनी पर्ची और इंडेंट की स्थिति पर नजर रखें। रमाला मिल ने दो लाख क्विंटल का इंडेंट जारी किया हुआ है, इसलिए जिन किसानों को इंडेंट मिला है, वे मिल या गन्ना समिति से पेराई शुरू होने की तारीख की पुष्टि करते रहें। पर्ची से जुड़ी जानकारी के लिए किसान ई-गन्ना ऐप और caneup.in पोर्टल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

दूसरा, गन्ना काटने से पहले मिल चलने की पुष्टि कर लें। अगर मिल में पेराई शुरू नहीं हुई है, तो गन्ना काटकर खड़ा करना नुकसान का सौदा हो सकता है — कटा गन्ना ज्यादा दिन पड़ा रहे तो वजन घटता है और खेत खाली होने में देरी से रबी की बुवाई पीछे खिसकती है। भुगतान या पर्ची से जुड़ी शिकायत के लिए किसान जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। गन्ना विभाग का टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-121-3203 है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बागपत और रमाला चीनी मिलों में पेराई क्यों नहीं शुरू हुई? मिल प्रबंधन के मुताबिक बरसात के कारण खेतों में पानी भरा है और गन्ना मिल तक नहीं पहुंच रहा है। बागपत मिल में दिवाली पर श्रमिकों के न आने को भी वजह बताया गया है।

रमाला और बागपत मिल का उद्घाटन कब हुआ था? रमाला मिल का उद्घाटन 2 नवंबर को और बागपत मिल का उद्घाटन 4 नवंबर को हुआ था।

दोनों मिलें कब चलेंगी? रमाला मिल प्रबंधन ने शनिवार को पेराई शुरू करने की बात कही है। बागपत मिल प्रबंधन का कहना है कि दिवाली के अगले दिन मिल चलेगी।

बागपत जिले में कितनी चीनी मिलें हैं? जिले में तीन चीनी मिलें हैं — बागपत और रमाला सहकारी क्षेत्र की मिलें हैं, जबकि मलकपुर निजी क्षेत्र की मिल है।

इस बार गन्ने का भाव क्या तय हुआ है? पेराई सत्र 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती का भाव 400 रुपये और सामान्य का 390 रुपये प्रति क्विंटल था।

स्रोत: दैनिक जागरण (7 नवंबर 2026), वॉयस ऑफ क्रांति (4 नवंबर 2026), ट्रैक्टर जंक्शन (4 नवंबर 2026, अपडेट 7 नवंबर 2026), बिजनेस स्टैंडर्ड (3 नवंबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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